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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Mutual allegations of cruelty will not grant divorce by mutual consent: Court

आपस में क्रूरता के आरोप लगाने पर नहीं मिलेगा सहमति से तलाक : कोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2026 08:46 PM IST
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न्यायालय ने परिवार अदालत के आदेश को रद्द किया
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विवादित मुकदमे को आपसी सहमति से तलाक में बदल दिया था


गौरव बाजपेई
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि यदि पति-पत्नी एक-दूसरे पर क्रूरता के आरोप लगा रहे हैं, तो इसे आपसी सहमति (म्यूचुअल कंसेंट) से तलाक नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने परिवार अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें विवादित मुकदमे को आपसी सहमति से तलाक में बदल दिया गया था।
न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति रेणु भटनागर की खंडपीठ ने पत्नी की अपील पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत अलग-अलग क्रूरता के आरोप लगाना धारा 13बी के तहत आपसी सहमति नहीं बनाता। कोर्ट ने कहा कि केवल यह तथ्य कि दोनों पक्ष विवाह विघटन चाहते हैं, अपने आप में धारा 13बी के अर्थ में आपसी सहमति नहीं है। एक पक्ष क्रूरता के आधार पर तलाक मांग सकता है और दूसरे पक्ष के आरोपों का विरोध भी कर सकता है। ऐसे प्रतिद्वंद्वी दावे अपनी प्रतिकूल प्रकृति बनाए रखते हैं। दंपती का जनवरी 2023 में विवाह हुआ था। कोई संतान नहीं हुई। जनवरी 2024 से दोनों अलग रह रहे थे। पति ने परिवार अदालत में धारा 13(1)(आईए) के तहत क्रूरता का हवाला देते हुए तलाक की याचिका दायर की। पत्नी ने लिखित बयान में पति पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए काउंटर क्लेम दायर किया। मार्च 2025 में परिवार अदालत ने दोनों के बयानों को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले को आपसी सहमति से तलाक में बदल दिया और विवाह विघटित कर दिया। पत्नी ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की।
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कोर्ट का तर्क
धारा 13 क्रूरता जैसे दोष-आधारित आधारों पर तलाक की अनुमति देती है, जबकि धारा 13बी आपसी सहमति पर आधारित है। आपसी सहमति के लिए संयुक्त याचिका जरूरी है और सहमति अंत तक बनी रहनी चाहिए। प्रतिद्वंद्वी आरोपों वाले मामले में अदालत को सबूतों के आधार पर फैसला करना चाहिए, न कि सहमति मानकर तलाक दे देना चाहिए। हाईकोर्ट ने परिवार अदालत को निर्देश दिया कि वह मूल मामले में मुद्दे तय करे, दोनों पक्षों को सबूत पेश करने का मौका दे और मेरिट पर फैसला करे।
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