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मुस्लिम वोटरों के हाथों है इन दिग्गजों की किस्मत!

Thu, 10 Apr 2014 02:25 AM IST
Updated Thu, 10 Apr 2014 02:25 AM IST
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muslim voters will decide win and lose

जैसा कि हर बार होता आया है कि मुसलमान वोटर भाजपा के खिलाफ लामबंद होकर वोट डालते हैं, मगर इस बार स्थिति बड़ी भ्रामक है। आखिरी वक्त तक मुस्लिम वोटर तय नहीं कर पा रहे हैं कि भाजपा प्रत्याशी वीके सिंह को कौन सा प्रत्याशी हरा सकता है।

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हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी राजबब्बर, आप की शाजिया इल्मी, बसपा के मुकुल उपाध्याय और सपा के सुधन रावत सभी भाजपा प्रत्याशी को जोरदार टक्कर देने का ऐलान कर रहे हैं।
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विकास और राजनीतिक पार्टियों के एजेंडे से शुरू हुए चुनाव के परिणाम मुस्लिम मतदाताओं के निर्णय से प्रभावित हो सकता है।

मुस्लिम वोटर तय करेंगे जीत-हार

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गाजियाबाद संसदीय सीट पर 4.5 लाख मुस्लिम मतदाता है। दिल्ली से सटी इस सीट को जीतने में प्रमुख पार्टियों ने मेहनत लगा दी है। बृहस्पतिवार को होने वाले चुनाव का परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि मुस्लिम वोट एकजुट होते या बंटकर पड़ते हैं।

यदि मुस्लिम वोट एकजुट हुए तो क्यों और किस राजनीतिक दल का समर्थन कर सकते हैं। मुस्लिम वोट के इस गणित को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के आका भी भली-भांति जानते हैं।

यही कारण है कि गाजियाबाद में आने वाले प्रत्येक राजनीतिक दल के मुखिया की जुबां पर मुस्लिम वोट का मुद्दा ही छाया रहा। बात चाहे सीएम अखिलेश यादव की हो, या फिर बसपा सुप्रीमो मायावती की। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी हो या फिर रालोद नेता अजित सिंह। सबने मुस्लिमों को लुभाने की कोशिश की है।

यह हो सकते हैं विकल्प :

muslim voters will decide win and lose

बीजेपी के पक्ष में मुस्लिम मतदाताओं के जाने की उम्मीद नहीं है। इनकी प्राथमिकता दूसरे राजनीतिक दल हो सकते हैं। कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने के लिए शाही इमाम संदेश जारी कर चुके हैं। हालांकि उनका मुस्लिम में प्रभाव नाममात्र का रह गया है।

गाजियाबाद सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी राजबब्बर को बाहरी प्रत्याशी मानकर कांग्रेस संगठन में विरोध होता रहा है। पार्टी का परंपरागत वोट बैंक भी इस चुनाव में प्रभावित हो सकता है। मुस्लिमों के एकजुट होकर मिलने से कांग्रेस का बेड़ा पार हो सकता है।

बसपा प्रत्याशी मुकुल उपाध्याय मुस्लिम मतों पर सबसे प्रभावी दावा जता रहे हैं। इनके साथ दलितों का थोक वोट बैंक है। अकेले ब्राह्मण प्रत्याशी होने के नाते इन मतों पर भी भरोसा है। ऐसे में यदि मुस्लिम एकजुट होकर इनको मिलते हैं तो जीत पक्की हो सकती है।

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इनका भी अपना दावा

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मुस्लिमों के लिए किए गए कार्यों के चलते सपा भी इनकी पसंद हो सकती है।

AAP प्रत्याशी शाजिया इल्मी मुस्लिम होने के नाते इन पर अपनी उम्मीद जता रही हैं। लेकिन संगठन के ज्यादा प्रभावी न होने और आप का ठोस वोट बैंक न होने से शायद मुस्लिम भी इनकेपक्ष में एकजुट नहीं होगा।

यदि मुस्लिम मत एकजुट होकर बसपा-कांग्रेस में से किसी एक दल का समर्थन करते हैं तो बीजेपी का विजयरथ अटक सकता है। ऐसे में मुस्लिमों की पसंद वाले दल की टक्कर बीजेपी से होगी।

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