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बरखा ने मोदी को लिखा ऐसा लेटर जो मचा सकता है बवाल

Sat, 13 Sep 2014 03:03 PM IST
Updated Sat, 13 Sep 2014 03:03 PM IST
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Muslim personal law should be abolished: barkha singh.

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में जन्मीं बरखा सिंह कांग्रेस की नेता हैं। 2003 में ये दिल्ली विधानसभा की सदस्य चुनी गईं। फिलहाल दिल्ली महिला आयोग की चेयर पर्सन हैं।

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शुरु से ही कविता लिखने और कविता पाठ में भी इनकी काफी रुचि रही है। कई कवि सम्मेलनों में वह अपनी कविताओं का पाठ भी कर चुकी हैं।

कविता पाठ के अलावा साहित्य लेखन में भी इनकी रुचि है। इनकी लिखी एक किताब 'भीड़ में जब हम अकेले' के लिए उन्हें त्रिभाषा सम्मेलन पुरस्कार भी मिल चुका है।
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बरखा राजनीति के अलावा समाज सेवा में भी सक्रिय हैं। दिल्ली के आरके पुरम इलाके में इनका एक स्कूल चलता है। 'अनुभव शिक्षा केंद्र' के नाम से चलने वाले इस स्कूल में गरीब बच्चों को शिक्षा दी जाती है।
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लेकिन फिलहाल इनके चर्चा में आने की वजह प्रधानमंत्री को लिखी एक चिट्टठी है जिसने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

आगे पढ़िए क्या है उस पत्र का मामला...

महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकता है पर्सनल

Muslim personal law should be abolished: barkha singh.

दिल्ली महिला आयोग की चेयरपर्सन बरखा सिंह अपने एक बयान की वजह से सुर्खियों में हैं। उन्होंने कहा है कि मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का हक दिलाने में मुस्लिम पर्सनल लॉ बाधक है।

बरखा ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकता है इसलिए इसे समाप्त कर देना चाहिए।

बरखा ने सभी धर्म-संप्रदायों के लिए समान कानून की मांग करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ को खत्म करने की मांग की है।

वह शुक्रवार को दिल्ली महिला आयोग के ‘रोल ऑफ मैन, फैमिली एंड कम्युनिटी इन वूमन सिक्योरिटी’ विषय पर आयोजित सेमिनार में एनजीओ की महिलाओं समेत आयोग की सदस्यों को संबोधित कर रही थीं।

कॉमन सिविल कोड पर बढ़ सकती है बहस

Muslim personal law should be abolished: barkha singh.

इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों समेत अशिक्षित व अभाव ग्रस्त क्षेत्रों में रहने वाली ज्यादातर मुस्लिम महिलाएं ऐसे कानून से न सिर्फ प्रभावित होती हैं, बल्कि स्वयं को आर्थिक, सामाजिक व पारिवारिक दृष्टि से असुरक्षित महसूस करती हैं।

महिलाओं की बेहतरी के लिए सभी धर्मों की महिलाओं के लिए एक ही कानून होना चाहिए। गौरतलब है ‌कि कॉमन सिविल कोड भाजपा का मुद्दा रहा है। हालांकि इसका विरोध भी होता रहा है।

विवादास्पद मुद्दा होने की वजह से किसी भी पार्टी का बड़ा नेता इस मामले पर बयान देने से बचता है। ऐसे में कांग्रेस से जुड़ी एक नेता का इस तरह बयान देना और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मुस्लिम पर्सनल लॉ को खत्म करने की मांग से राजनीतिक गलियारों में यह बहस तेज हो सकती है कि क्या कांग्रेस भी कॉमन सिविल कोड के पक्ष में है।

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