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100 स्कूलों में मुस्लिम बच्चे संस्कृत पढ़ने को मजबूर!

Tue, 02 Sep 2014 03:55 PM IST
Updated Tue, 02 Sep 2014 03:55 PM IST
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Muslim Kids Forced to Study Sanskrit.

देश की राजधानी के 100 सरकारी स्कूलों में 14,000 से ज्यादा बच्चे संस्कृत पढ़ने के लिए मजबूर हैं। टीओआई में छपी खबरी के मुताबिक सुल्तानपुरी के सर्वोदय कन्या विद्यालय में ही करीब 789 मुस्लिम बच्चे हैं लेकिन, यहां उर्दू का एक भी टीचर नहीं है।

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नवा-ए-हक नाम के एक एनजीओ ने यह खुलासा किया है। इस संस्था के मुताबिक डायरेक्टर ऑफ एजूकेशन द्वारा जारी डायरेक्शन के बावजूद अधिकांश स्कूलों में उर्दू के टीचर नहीं हैं।
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संस्था का कहना है कि यह 1973 में बने दिल्ली स्कूल एजूकेशन एक्ट का सीधा उल्लंघन है। साथ ही यह संविधान की उन धाराओं का भी उल्लंघन है जिसमें बच्चों को छठवीं से दसवीं कक्षा के बीच अपनी मातृभाषा को पढ़ने की आजादी दी गई है।
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गौरतलब है कि 21 मई 2012 को डायरेक्टर ऑफ एजूकेशन की वेलफेयर ब्रांच ने एक सर्कुलर जारी करते हुए कहा था कि सभी स्कूल बच्चों के एडमिशन करते समय ही लैंग्वेज प्रिफरेंस को रिकार्ड करें। साथ ही स्कूलों को इस बारे में निर्देश दिया कि वह लैंग्वेज टीचर की नियुक्ति के बारे में तुरंत ही डीओआई को सूचित करें।

100 स्कूलों में उर्दू का कोई भी टीचर नहीं

Muslim Kids Forced to Study Sanskrit.

इस सूचना के बाद 15 जुलाई 2013 को दूसरा निर्देश भी जारी किया गया। दूसरे निर्देश में असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ एजूकेशन ने सभी जिलों के डिप्टी डायरेक्टर्स को ‌लिखा कि दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में उर्दू टीचरों की नियुक्ति की व्यवस्‍था की जाए।

सभी स्कूलों से छात्रों की संख्या के आधार पर उर्दू टीचरों की भर्ती के बारे में भी जानकारी मांगी गई। उर्दू टीचरों की कमी का खुलासा करने वाली संस्‍था नवा-ए-हक के प्रेसिडेंट असद गाजी ने बताया कि उनके द्वारा दायर आरटीआई में इस बात का खुलासा हुआ।

आधिकारिक घोषणा के बावजूद दिल्ली के अधिकांश सरकारी स्कूलों में उर्दू पढ़ाने की कोई व्यवस्‍था नहीं है। इस कारण मुस्लिम छात्रों के पास संस्कृत पढ़ने के अलावा कोई दूसरा विकल्प बचा ही नहीं है।

मुस्लिम पढ़ाने के लिए नहीं हैं उर्दू टीचर

Muslim Kids Forced to Study Sanskrit.

नवा-ए-हक के प्रेसिडेंट असद गाजी का कहना है कि उन्होंने 100 स्कूलों की पहली सूची डीओआई, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक भाषा आयोग और सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन एंड उर्दू एकेडमी को भेज दी है।

उनकी सस्‍था सरकारी स्कूलों की दूसरी लिस्ट पर भी काम कर रही है। असद का कहना है कि दूसरी लिस्ट में भी स्थिती कमोबेश ऐसी ही है।

संस्‍था ने जिन 100 स्कूलों की लिस्ट जारी की है उनमें से 50 स्कूलों में 100 या उससे ज्यादा मुस्लिम स्टूडेंट हैं जबकि 16 ऐसे स्कूल हैं जिनमें 250 से ज्यादा मुस्लिम स्टूडेंट हैं। ये सभी छात्र संस्कृत पढ़ने के ल‌िए मजबूर हैं।

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