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मुरफाद मामले में हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव से मांगा जवाब, एक हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 20 Aug 2018 10:33 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के आवास पर मारे गए मुरफाद हुसैन शाह के मामले में हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव सहित राज्य गृह विभाग के प्रधान सचिव, डीजीपी, आईजी और अन्य से तीन हफ्तों में जवाब मांगा है।
मुरफाद के परिवार ने उस सीआरपीएफ कर्मी पर हत्या का केस दर्ज करने की याचिका दायर की है, जिसने उस पर गोली चलाई थी। जस्टिस संजय कुमार गुप्ता ने केंद्रीय गृह सचिव, राज्य गृह विभाग के प्रधान सचिव, डीजीपी जम्मू कश्मीर, आईजी जम्मू, एसएसपी जम्मू, एसएचओ त्रिकुटा नगर को आदेश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले वह सभी अपना जवाब पेश करें।
मुरफाद के पिता इमजाद हुसैन ने एडवोकेट शकील अहमद के हवाले से कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि गृह सचिव और डीजीपी को आदेश दिया जाए कि वह विशेष जांच टीम (सिट) बनाएं। इसका नेतृत्व कोई आईजी रैंक का अधिकारी करे। बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के इस मामले की जांच हो।
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मुरफाद के परिवार ने उस सीआरपीएफ कर्मी पर हत्या का केस दर्ज करने की याचिका दायर की है, जिसने उस पर गोली चलाई थी। जस्टिस संजय कुमार गुप्ता ने केंद्रीय गृह सचिव, राज्य गृह विभाग के प्रधान सचिव, डीजीपी जम्मू कश्मीर, आईजी जम्मू, एसएसपी जम्मू, एसएचओ त्रिकुटा नगर को आदेश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले वह सभी अपना जवाब पेश करें।
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मुरफाद के पिता इमजाद हुसैन ने एडवोकेट शकील अहमद के हवाले से कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि गृह सचिव और डीजीपी को आदेश दिया जाए कि वह विशेष जांच टीम (सिट) बनाएं। इसका नेतृत्व कोई आईजी रैंक का अधिकारी करे। बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के इस मामले की जांच हो।
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अपीलकर्ता ने कहा कि पुलिस ने सीआरपीएफ की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली, लेकिन मृतक के पिता की शिकायत को दरकिनार कर दिया। मृतक के पिता ने इसके बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
एडवोकेट सुनील सेठी ने कोर्ट में कहा कि कई सबूत पेश किए गए हैं, जिससे साबित होता है कि मुरफाद की हत्या की गई। फिर पुलिस के पास एफआईआर दर्ज न करने का कोई कारण नहीं बचता। दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद जज ने उक्त अधिकारियों से इसे लेकर जवाब मांगा है।
एडवोकेट सुनील सेठी ने कोर्ट में कहा कि कई सबूत पेश किए गए हैं, जिससे साबित होता है कि मुरफाद की हत्या की गई। फिर पुलिस के पास एफआईआर दर्ज न करने का कोई कारण नहीं बचता। दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद जज ने उक्त अधिकारियों से इसे लेकर जवाब मांगा है।
हत्या का केस और एक करोड़ रुपये मुआवजा मांगा
याचिकाकर्ता ने सीआरपीएफ कर्मी के खिलाफ 302, 109, 120 बी और 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज करने की भी मांग रखी है। एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग भी याचिका में रखी गई है।
इससे पहले अपीलकर्ता के वकील सुनील सेठी और शकील अहमद ने कोर्ट में कहा कि यह बड़ी नाइंसाफी है। मुरफाद को पहले प्रताड़ित किया गया और फिर गोली मार दी गई। इसके बाद एक कहानी बनाकर साबित करने की कोशिश की गई कि युवक पर सुरक्षा को देखते हुए गोली चलाई गई।
इससे पहले अपीलकर्ता के वकील सुनील सेठी और शकील अहमद ने कोर्ट में कहा कि यह बड़ी नाइंसाफी है। मुरफाद को पहले प्रताड़ित किया गया और फिर गोली मार दी गई। इसके बाद एक कहानी बनाकर साबित करने की कोशिश की गई कि युवक पर सुरक्षा को देखते हुए गोली चलाई गई।