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...तो नगर निगम भी चला सकता है रैपिड मैट्रो
प्रवीण कुमार/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Fri, 31 Jan 2014 10:43 AM IST
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गुड़गांव नगर निगम चाहे तो शहरवासियों को अपने बूते रैपिड मैट्रो की सौगात दे सकता है। चौंकिए नहीं, नगर निगम में इतनी कूवत है। इसके लिए थोड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
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नगर निगम के पास शहर के विभिन्न हिस्सों में 720 एकड़ के करीब जमीन है। इसे किराए पर देकर इससे होने वाली आमदनी से यह सपना पूरा किया जा सकता है।
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2008 में नगर निगम के गठन के बाद करीब 35 गांव नगर निगम में शामिल हुए। इन गांवों की पंचायती जमीन भी नगर निगम की मलकियत हो गई। नगर निगम पिछने दिनों से अपनी जमीन को चिन्हित कर रहा है। इस दौरान करीब 2730 एकड़ जमीन नगर निगम की ओर से चिन्हित की गई। इसमें से 720 एकड़ एकदम खाली जमीन है।
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निगम के नायब तहसीलदार दीपचंद यादव ने बताया कि नाथूपुर और सिकंदरपुर की करीब 78 एकड़ जमीन पर पंचायती समय से कब्जा था, जिसका केस अदालत में चल रहा है। बाकि जमीन पर कहीं सरकारी निर्माण है तो कहीं किसी काम में प्रयोग हो रही है। पिछले दिनों ग्वाल पहाड़ी में 450 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है।
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घाटा गांव में 230 एकड़ के करीब जमीन है। यह जमीन अरावली पर्वत श्रृंखला में है। इस तरह निगम की कुल 720 एकड़ के करीब जमीन का कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है। जानकारों के मुताबिक अगर इस पूरी जमीन को किसी भी प्रयोजन के लिए किराए पर दिया जाए तो प्रतिमाह निगम की करोड़ो रुपये की कमाई हो सकती है।
गुड़गांव में जमीन के भाव और किराया किसी से छुपा नहीं है। यहां 10 बाई 10 के एक कमरे के लिए भी 2500 से 3500 रुपये तक किराया चुकाना पड़ता है। यह हाल शहर की अविकसित कॉलोनियों का है।
रैपिड मैट्रो के प्रोजेक्ट पर नजर दौड़ाएं करीब छह किलोमीटर के प्रोजेक्ट पर डीएलएफ ने 1088 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस खर्च में छह किलोमीटर एलिवेटेड रेलवे ट्रैक, पांच स्टेशन और पांच रैपिड मैट्रो शामिल है। जिनका संचालन कॉरपोरेट कंपनियों के लिए किया जा रहा है। निगम एक साल में 1000 करोड़ रुपये तक का बजट निर्धारित करता है। इस बजट को बढ़ा कर शहर को बड़ी सौगात दी जा सकती है।
कहां कितनी जमीन
बादशाहपुर में 8 एकड़, पवाला में 40, सराय अलावर्दी में 10, खेड़की माजरा में 40, खेड़की दौला में 15, कादीपुर में 10, बेगमपुर खटोला में 14 एकड़ के अलावा यहां भी 4-5 एकड़ जमीन है। नयाब तहसीलदार के अनुसार हर गांव में जमीन एक ही जगह हैं।