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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Mundka's water body is in bad condition, authentic report sought

Delhi NCR News: मुंडका के जल निकाय की हालत खराब, प्रामाणिक रिपोर्ट तलब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Sep 2025 07:19 PM IST
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- डॉ. जीत सिंह यादव ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि मुंडका के उक्त खसरा नंबरों के अंतर्गत आने वाले तालाब और जल निकाय अतिक्रमण, प्रदूषण और उपेक्षा के कारण खराब हालत में है
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संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली के मुंडका गांव में जल निकायों और तालाबों की खराब स्थिति को लेकर दायर याचिका पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कई विभागों को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था, लेकिन अधूरी और अनाधिकृत रिपोर्टों के कारण अधिकरण ने इनको खारिज कर दिया। ऐसे में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की पीठ ने अब दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) और अन्य विभागों को सही और प्रामाणिक रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है। मामले में अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।
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अदालत ने पाया कि डीएसआईआईडीसी, दिल्ली सरकार और अन्य संबंधित विभागों की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में कई खामियां थीं। कुछ रिपोर्टों में प्राधिकारी पत्र (ऑथारिटी लेटर) का अभाव था, जबकि अन्य अधूरी थीं। खास तौर पर खसरा नंबर 17/27 के संबंध में डीएसआईआईडीसी की रिपोर्ट को अपर्याप्त माना गया। एनजीटी ने ऐसी सभी रिपोर्टों को अस्वीकार करते हुए डीएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक और दिल्ली के उपायुक्त (पश्चिम) को स्वयं या किसी अधिकृत अधिकारी के माध्यम से शपथ पत्र के साथ सटीक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। अधिकरण ने चेतावनी दी कि यदि यह आदेश पूरा नहीं हुआ तो संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से दाखिल काउंटर एफिडेविट को भी एनजीटी ने खारिज कर दिया, क्योंकि मंत्रालय इस मामले में प्रतिवादी नहीं है। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि केवल याचिका में शामिल प्रतिवादियों को ही जवाब दाखिल करने का अधिकार है। अदालत ने दिल्ली सरकार और अन्य विभाग को एक महीने के अंदर प्रामाणिक और पूरी स्टेटस रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। डॉ. जीत सिंह यादव ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि मुंडका के उक्त खसरा नंबरों के अंतर्गत आने वाले तालाब और जल निकाय अतिक्रमण, प्रदूषण और उपेक्षा के कारण खराब हालत में हैं। ये जल निकाय भूजल स्तर को बनाए रखने, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इन जल निकायों की सफाई, संरक्षण और पुनर्जनन के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए।
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