26/11 आतंकी हमला: गौतम ने दोस्तों को बचाते हुए गंवाई थी जान, याद कर आज भी रो पड़ती हैं मां
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मुंबई के ताज होटल पर 26/11 के आतंकी हमले में शहीद हुए फरीदाबाद के युवा गौतम गोसाई को याद कर माता-पिता को सुख मिलता है तो बस इस बात का कि उनका बेटा अमर हो गया है।
स्थानीय सेक्टर-48 निवासी देव सिंह गोसाई का 23 वर्षीय बेटा सोफिया कॉलेज से शेफ का कोर्स कर रहा था। कॉलेज की ओर से ट्रेनिंग पर उसे मुंबई के ताज होटल में नियुक्त किया गया। वर्ष 2008 में 26 नवंबर को जब आतंकियों ने होटल ताज पर कब्जा कर आतंकी वारदात को अंजाम दिया, तब गौतम ने अपने साथियों की जान बचाते हुए अपनी जान गंवा दी थी।
गौतम गोसाई की इस शहादत के लिए टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा ने उनके पिता देव सिंह गोसाई को जीवन रक्षक अवार्ड भी सौंपा था। गढ़वाल सभा द्वारा गौतम की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाती रही है।
गौतम के पिता देव सिंह गोसाई ने कहा कि गौतम पूरे परिवार का दुलारा था। गौतम की मां राधा को पता है कि बेटा शहीद होकर अमर हो गया है, लेकिन वह उसे याद कर व्यथित हो उठती है।
मुंबई हमले के बाद हथियार एवं ट्रेनिंग का स्तर बदला
मुंबई हमले के बाद एनएसजी को एसपीजी की भांति सुविधा मिलनी आरंभ हो गई है। वहीं एनएसजी को सेना की भांति आतंकवादियों से निपटने के लिए हथियार उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा एनएसजी कमांडो को बेहतर ट्रेनिंग देने की शुरुआत हुई है। इस तरह एनएसजी को आतंकवादियों से लोहा लेने में हथियारों की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।
एनएसजी का 1986 में गठन किया गया था। यह पूरी तरह से केंद्रीय अर्धसैनिक बल के ढांचे के भीतर काम करता है। इसका गठन 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के चलते किया गया था। एनएसजी कमांडो का पहले अलगाववादी आंदोलन से निपटने के लिए इस्तेमाल किया गया। मगर अब कई वर्षों से उनकी मदद आतंकियों से निपटने में ली जाती है।
मुंबई हमले के बाद एनएसजी कमांडो को जर्मनी से प्रशिक्षण दिलवाया गया। इसके अलावा आधुनिक हथियार उपलब्ध कराए गए। इस तरह अब एनएसजी कमांडो बड़े से बड़े आतंकी हमले से निपटने में समक्ष हैं। कमांडो फोर्स के लिए भी कई चरणों में चुनाव होता है।
सबसे पहले जिन रंगरूटों का कमांडो के लिए चयन होता है वे अपनी-अपनी फोर्सेज के सर्वश्रेष्ठ सैनिक होते हैं। इसके बाद भी उनका चयन कई चरणों से गुजर कर होता है। अंत में ये सैनिक ट्रेनिंग के लिए मानेसर एनएसजी के ट्रेनिंग सेंटर पहुंचते हैं। 90 दिन की कठिन ट्रेनिंग के पहले भी एक सप्ताह की ऐसी ट्रेनिंग होती है जिसमें 15-20 प्रतिशत सैनिक अंतिम दौड़ तक पहुंचने में चूक जाते हैं।
बता दें कि इससे पहले भी अमेरिका कई बार पाकिस्तान से आतंकवादी संगठन लश्कल ए तैयबा जैसे संगठनो पर बैन करने को कह चुका है। अमेरिका ने कहा कि आतंकवाद के जिम्मेदार संगठनों पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।