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लाल किले में मिले मुगलकालीन अवशेष
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 25 Nov 2014 08:14 AM IST
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अंग्रेजों के नष्ट करने के बाद फुटबाल मैदान में तब्दील हो चुके लाल किले का मेहताब बाग एक बार फिर अपनी पुरानी रंगत में लौटेगा। इस बाग का इस्तेमाल शाही परिवार रात के सैर सपाटे के लिए करता था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इसके संरक्षण का काम शुरू कर दिया है। खुदाई में यहां 16वीं शताब्दी के मुगलकालीन अवशेष मिले हैं। एएसआई का कहना है कि खुदाई के साथ इसका वास्तविक रूप भी धीरे-धीरे सामने आ रहा है।
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एएसआई सूत्रों के मुताबिक खुदाई में मिले खिलौनों में सेरेमिक का बना तोता, कुछ पक्षी, टूटी प्लेट और शो केश जैसी चीजें मिली हैं। बाग में जो नहरे बारहिस्त बहती थी उसकी सही तस्वीर अब सामने आ रही है।
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इसके अंदर बना झरने का भी आकार भी धीरे-धीरे सामने आ रहा है। जिस बडे़ टैंक से नहरों और झरनों में पानी जाता था उसकी भी खोज भी की जा चुकी है। हालांकि अभी एएसआई को खुदाई में लंबा समय लगेगा उसके बाद बाग की वास्तविक तस्वीर सबके सामने आएगी।
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खुदाई में मिली प्लेट के बारे में अनुमान लगाया जा रहा है कि यह सभी सजावट के सामान रहें होंगे। फिलहाल एएसआई इनके टुकड़ों को जोड़कर सच्चाई का पता लगाने की कोशिश कर रही है। बताते चलें कि इस बाग को 1857 में अंग्रेजों ने नष्ट कर दिया था।
दीवान-ए-खास में मिली नौ परतों वाली छत
एएसआई लाल किले में मौजूद दीवान-ए-खास के संरक्षण का भी काम कर रही है। इसके छतों की मरम्मत का काम चल रहा है। इसी दौरान एएसआई को यहां नौ परतों वाली छत मिली है। इसमें मिट्टी की ईंट, लकड़ी, पत्थर और मिट्टी की परतों से छत को बनाए जाने की बात सामने आई है। एएसआई ने कहा कि हम बेहद बारीकी से इसकी रंगत को दोबारा पहले की ही तरह लाने की कोशिश कर रहे हैं।