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हिन्दी को पेट की भाषा बनाने की जरूरत- सिन्हा

Sat, 14 Sep 2019 03:11 PM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Sat, 14 Sep 2019 03:11 PM IST
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mridula sinha Need to make Hindi the language of stomach on Hindi Diwas 2019
मृदुला सिन्हा (फाइल फोटो)
हिंदी से हिंदुस्तान है तभी तो हमारी शान हैं। विश्व हिंदी परिषद की ओर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर एनडीएमसी सभागार में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने किया।
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राज्यपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ बिताए पल साझा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की वो बात नहीं रही, बच्चे बिगड़ रहे हैं। हिंदी और भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए सभी को आगे आना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हिंदी दिल की भाषा है, जिसे पेट की भाषा बनाने की जरूरत है। 
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जब हिंदी पेट की भाषा होगी तो लोग अपने बच्चों को हिंदी पढ़ाने में गर्व महसूस करेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल, केंद्रीय राज्य मंत्री (प्रधानमंत्री कार्यालय) जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रपिता के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें खुशी है कि ‘स्वच्छ भारत व खादी’ सहित गांधीजी के सपनों को साकार करने का जिम्मा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिला है। 
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एनडीएमसी की सचिव रश्मि सिंह ने कहा कि हर माता-पिता को अपने बच्चों को हिंदी के महत्व के बारे में बताना चाहिए। नीति आयोग के मुख्य सलाहकार अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदी हमारे हृदय की भाषा है। 

गांधीजी ने कहा था कि तब तक कोई देश स्वतंत्र नहीं हो सकता जब तक वह अपनी राष्ट्रभाषा को गले नहीं लगाता। जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा कि हिंदी एक भाषा नहीं बल्कि जीवनशैली है। इस दौरान कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया।


उपहार में सौंप रहे गीता  

ताज सम्मेलन में उपस्थित डॉ. इंद्रेश कुमार (राष्ट्रीय स्वयं सेवक, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य) ने कहा कि हिंदी मानवीय जीवन के अनुकूल भाषा है। उन्होंने कहा कि हम 70 साल तक विदेशी मेहमानों को उपहार में ताज सौंपते थे, लेकिन पिछले पांच साल से हम उन्हें ‘गीता’ सौंप रहे है। भारत दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। 
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