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सिविल अस्पताल में एम्स से सस्ती होगी एमआरआई

Sun, 01 Nov 2015 07:06 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Sun, 01 Nov 2015 07:06 PM IST
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MRI will be cheaper than AIMS in civil hospital.

सिविल अस्पताल में जल्द ही एमआरआई और सीटी स्कैन की सुविधा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली से भी कम दाम में उपलब्ध होगी।

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अत्याधुनिक मशीनों से लैस इस जांच केंद्र का तोहफा जनता को दिवाली में मिलेगा। यह जांच सुविधाएं शुरू होने से आसपास के जिलों की जनता को भी फायदा होगा।

18 लाख की आबादी वाली औद्योगिक नगरी को सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का जिम्मा सरकारी सिविल अस्पताल का है। कैंसर, हृदयरोग, मांस पेशियों की समस्या, सड़क हादसे का शिकार, दिमाग की चोट आदि बीमारियों के बारे में सही जानकारी जुटाने के लिए सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी विशेष जांच बहुत जरूरी होती हैं।
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सिविल अस्पताल में अभी तक यह जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की वजह से मरीजों को दिल्ली रेफर कर दिया जाता था। पीएमओ डॉ. सुरेश चंद्र ने बताया कि दिवाली से यह जांच सुविधाएं आम जनता को उपलब्ध होंगी।
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एनएबीएल से मान्यता लेने की तैयारी

MRI will be cheaper than AIMS in civil hospital.

उन्होंने बताया कि पीपीपी मॉडल के तहत अजा रेडियोलॉजी इमेजिंग एंड मेडिकल केयर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सिविल अस्पताल का काम सौंपा गया है। कंपनी ने यहां मशीनें लगाई हैं। उनका संचालन और मेंटेनेंस का जिम्मा भी उसी का होगा।

सेंटर के डायरेक्टर नवनीत सक्सेना ने बताया कि विश्व की आधुनिकतम तकनीकी वाली 16 स्लाइस सीटी स्कैन और 128 स्लाइस एमआरआई मशीनें लगाई गई हैं।

सक्सेना ने बताया कि यहां विभिन्न जांचों का दाम एम्स की रेट लिस्ट से पांच से दस फीसदी कम रखा गया है। यही नहीं सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) में घोषित की गई रेट लिस्ट से भी कम दाम पर यहां जांच की जाएगी। निजी लैब से यहां जांच की कीमत पचास से साठ फीसदी तक कम रखी गई हैं।

सक्सेना ने बताया कि एमआरआई/सीटी स्कैन सेंटर को नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्रीज (एनएबीएल) में मान्यता लेने के लिए आवेदन किया गया है।

बताया कि एनएबीएल मान्यता मिलने से सरकार की ओर से प्रति जांच अधिक सब्सिडी मिलेगी, जिसका फायदा सीधे मरीजों को होगा। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने वाली संस्थाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई मानक तय किए गए हैं। इन पर खरा उतरने वाले अस्पतालों को एनएबीएच और लैबोरेट्री को एनएबीएल मान्यता दी जाती है। 

इन जांचों के रोजाना आते हैं दस से बारह मरीज

MRI will be cheaper than AIMS in civil hospital.

आंकड़ों के मुताबिक सिविल अस्पताल में सड़क व अन्य हादसों के शिकार औसतन चार सौ मामले प्रतिमाह आते हैं। इनमें से औसतन साठ फीसदी लोगों की आंतरिक चोटों का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन या एमआरआई जांच की जरूरत होती है।

कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. दिनेश रंगा के मुताबिक उनके पास औसतन आठ से दस मरीज प्रतिमाह ऐसे आते हैं जिनकी एमआरआई कराना जरूरी होता है। यही हालत गुर्दा व अन्य आंतरिक अंगों के रोग विभागों की भी है।

त्रिस्तरीय है स्वास्थ्य सेवा का ढांचा-
स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्तर में बांटा गया है। प्राथमिक स्तर में सामान्य बीमारियों का इलाज, टीकाकरण, स्वास्थ्य योजनाओं को लागू कराना आता है।

द्वितीयक स्तर में इन सेवाओं के अलावा सर्जरी और आंतरिक अंगों (दिल, गुर्दा, फेफड़ा, आंत, दिमाग आदि) की बीमारियों का इलाज किया जाता है। तृतीयक स्तर पर इलाज के साथ ही बीमारियों पर शोध भी किया जाता है।

प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्राथमिक स्तर की सेवाएं मुहैया कराई जाती हैं। जिला अस्पताल द्वितीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं देता है तो मेडिकल कॉलेज और आयुर्विज्ञान संस्थान तृतीयक स्तर पर आते हैं।

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