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मदर्स डे: जब खुदा से पहले मां ने सुनी पुकार, जिगर के टुकड़े को दिया अपने जिगर का हिस्सा, ममता के आगे हारी मौत

Sun, 10 May 2026 07:34 AM IST
Vijay Singh Pundir ज्योति सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योति सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Sun, 10 May 2026 07:34 AM IST
सार

मां का रिश्ता केवल जन्म देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने बच्चों के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। जब बात बच्चों की जान बचाने की आती है, तो मां ईश्वर से पहले उनकी पुकार सुन लेती है। ऐसी ही कुछ प्रेरणादायक कहानियां सामने आई हैं, जहां माताओं ने अपने जिगर के टुकड़ों को नई जिंदगी देने के लिए अपने अंग दिए हैं। ये कहानियां मां के निस्वार्थ प्रेम और त्याग की मिसाल पेश करती हैं।

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Mother's Day 2026 When a Mother Saved Her Child's Life by Donating an Organ
मदर्स डे - फोटो : Adobe

विस्तार

मां सिर्फ जन्म नहीं देती, बल्कि जरूरत पड़ने पर वह बच्चों के लिए खुद को भी दांव पर लगा देती है। इसलिए तो कहा जाता है कि जब बात बच्चों की जान पर बन आए तो भगवान से पहले मां अपने बच्चों की पुकार सुन लेती है। आज की कहानियां भी कुछ ऐसी ही हैं, जहां मां ने अपना रिश्ता सिर्फ जन्म तक सीमित नहीं रखा, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनके लिए जिंदगी भी दांव पर लगा दी। बच्चे की सांसें बचाने के लिए किसी ने लिवर तो किसी ने किडनी देकर अपने जिगर के टुकड़े की जिंदगी में फिर उम्मीद की रोशनी भर दी। ऐसी ही कुछ मांओं के बारे में जानिए।

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मां ने लिवर दे लौटाई बेटी की मुस्कान, नई जिंदगी मिली
राधिका खंडेलवाल की बेटी आध्या को जन्म से ही कुछ परेशानियां थीं। 84वें दिन एक जांच के बाद, राधिका को पता चला, कि उनकी बेटी को बिलियरी एट्रेसिया नाम की दुर्लभ बीमारी है। इस बीमारी में पित्त की नलिकाएं सही से विकसित नहीं हो पातीं, जिससे लिवर धीरे-धीरे खराब होने लगता है। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी को लीवर का हिस्सा देने का फैसला तुरंत ले लिया। सर्जरी बहुत जटिल रही। 12 दिन वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहना पड़ा और करीब एक महीने अस्पताल में भर्ती रही। सेडेशन के साइड इफेक्ट से आंखों की रोशनी भी चली गई लेकिन सर्जरी के महीने बाद ही मुस्कान लौट आई। 
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मां ने लिवर देकर बचाई अपने बेटे की जिंदगी
सात साल के लंबे इंतजार के बाद हमारा बेटा हमारी जिंदगी में आया था। वह अपने साथ दुनिया भर की खुशियां लेकर आया, लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। यह कहना है लोइंगम्बा की मां नगांथोई का, जिन्होंने अपने बेटे को नई जिंदगी देने के लिए अपना लिवर दान कर दिया। जन्म के महज पांच दिन बाद ही उनके बेटे में पीलिया के लक्षण दिखाई देने लगे। परिवार तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचा। डॉक्टरों ने परिवार को लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी। फिर तय किया कि हर हाल में बेटे को बचाएंगे। इसके बाद उन्होंने बिना हिचकिचाहट के अपने बेटे को लीवर दान दिया।
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पहले मां बनने का सपना टूटा, फिर बेटे के लिए दिया लिवर
मेरा बेटा सिर्फ नौ महीने का था, जब मैंने उसकी जिंदगी बचाने के लिए अपने लीवर का एक हिस्सा दान किया। यह कहना है उस मां का, जिसने अपने बेटे याजत को दूसरी जिंदगी देने के लिए खुद ऑपरेशन थिएटर का रास्ता चुना। तीन बार गर्भपात का दर्द झेलने के बाद उनके घर बेटे याजत का जन्म हुआ था। परिवार के लिए वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। उसकी छोटी-सी मुस्कान ने घर को खुशियों से भर दिया था। लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। जरूरत पड़ने पर मां ने आपना लिवर उसे दे दिया।

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