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Delhi NCR News: मूर्ति विसर्जन के लिए 80 से ज्यादा कृत्रिम तालाब तैयार
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- पर्यावरण मंत्री सिरसा ने कहा- आस्था के साथ जिम्मेदारी से मनेगा त्योहारों का जश्न
- विसर्जन के बाद तालाबों का पानी दोबारा सड़कों और पार्कों में होगा उपयोग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा के बाद दिल्ली में मूर्ति विसर्जन अब पर्यावरण के अनुकूल होगा। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि मूर्ति विसर्जन के लिए 80 से अधिक कृत्रिम तालाब तैयार किए गए हैं। इस बार यमुना को प्रदूषण से बचाया जाएगा और श्रद्धालु आसानी से विसर्जन कर सकेंगे।
पर्यावरण मंत्री ने सोमवार को सभी 11 जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मूर्ति विसर्जन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आस्था के साथ जिम्मेदारी जोड़कर हम यमुना को स्वच्छ रख सकते हैं और त्योहारों को और जीवंत बना सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में 80 से अधिक कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं। इनमें पश्चिम दिल्ली में 20, पूर्वी दिल्ली में 16, उत्तर-पश्चिम में 12, दक्षिण-पूर्व में 9, दक्षिण-पश्चिम में 7, शाहदरा, दक्षिण और उत्तर-पूर्व में 5-5, मध्य दिल्ली में 4 और उत्तर दिल्ली में 1 तालाब शामिल हैं। ये तालाब स्थानीय विधायकों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों के साथ मिलकर बनाए गए हैं, ताकि हर मोहल्ले में सुविधा हो।
सुरक्षा और सुविधा का रहेगा खास इंतजाम
सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग तालाबों की खुदाई कर रहा है, जबकि दिल्ली जल बोर्ड इन्हें साफ पानी से भरेगा। पर्यावरण मंत्री ने निर्देश दिया कि विसर्जन के बाद तालाबों का पानी सड़कों पर धूल नियंत्रण और पार्कों की सिंचाई में दोबारा इस्तेमाल होगा। हर विसर्जन स्थल पर सुरक्षा और सुविधा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी की निगरानी में इमरजेंसी मेडिकल सुविधा और एंबुलेंस उपलब्ध होंगी। दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर ट्रैफिक डायवर्जन, सीसीटीवी और भीड़ प्रबंधन की योजना बनाई गई है। उत्सव समितियों से अपने विसर्जन मार्ग पुलिस को देने को कहा गया है।
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- विसर्जन के बाद तालाबों का पानी दोबारा सड़कों और पार्कों में होगा उपयोग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा के बाद दिल्ली में मूर्ति विसर्जन अब पर्यावरण के अनुकूल होगा। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि मूर्ति विसर्जन के लिए 80 से अधिक कृत्रिम तालाब तैयार किए गए हैं। इस बार यमुना को प्रदूषण से बचाया जाएगा और श्रद्धालु आसानी से विसर्जन कर सकेंगे।
पर्यावरण मंत्री ने सोमवार को सभी 11 जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मूर्ति विसर्जन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आस्था के साथ जिम्मेदारी जोड़कर हम यमुना को स्वच्छ रख सकते हैं और त्योहारों को और जीवंत बना सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में 80 से अधिक कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं। इनमें पश्चिम दिल्ली में 20, पूर्वी दिल्ली में 16, उत्तर-पश्चिम में 12, दक्षिण-पूर्व में 9, दक्षिण-पश्चिम में 7, शाहदरा, दक्षिण और उत्तर-पूर्व में 5-5, मध्य दिल्ली में 4 और उत्तर दिल्ली में 1 तालाब शामिल हैं। ये तालाब स्थानीय विधायकों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों के साथ मिलकर बनाए गए हैं, ताकि हर मोहल्ले में सुविधा हो।
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सुरक्षा और सुविधा का रहेगा खास इंतजाम
सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग तालाबों की खुदाई कर रहा है, जबकि दिल्ली जल बोर्ड इन्हें साफ पानी से भरेगा। पर्यावरण मंत्री ने निर्देश दिया कि विसर्जन के बाद तालाबों का पानी सड़कों पर धूल नियंत्रण और पार्कों की सिंचाई में दोबारा इस्तेमाल होगा। हर विसर्जन स्थल पर सुरक्षा और सुविधा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी की निगरानी में इमरजेंसी मेडिकल सुविधा और एंबुलेंस उपलब्ध होंगी। दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर ट्रैफिक डायवर्जन, सीसीटीवी और भीड़ प्रबंधन की योजना बनाई गई है। उत्सव समितियों से अपने विसर्जन मार्ग पुलिस को देने को कहा गया है।
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