स्पाइना बिफिडा के सबसे ज्यादा मरीज भारत में, एक हजार में से एक या दो बच्चे होते हैं इसके शिकार
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स्पाइना बिफिडा नौनिहालों की रीढ़ की हड्डी से जुड़ी एक जन्मजात बीमारी है। इसके कारण नवजात शिशु को ज्यादातर कमर के आसपास फोड़ा होता है। कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं, जिनके सिर या गर्दन पर ये दिखाई देता है। दरअसल डॉक्टरों का कहना है कि इसके पीछे गर्भावस्था के दौरान महिलाओं द्वारा विटामिन का सेवन देरी से करना वजह है। देश में महिलाओं के बीच ये स्थिति इतनी विकट है कि दुनिया में सबसे ज्यादा इसके मरीज भारत में मिल रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार विश्व स्तर पर मरीज प्रति हजार एक या दो मिलते हैं जबकि भारत में ये आंकड़ा प्रति हजार चार से पांच है।
एम्स के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. एसएस काले का कहना है कि गर्भावस्था में महिलाओं के लिए विटामिन बहुत जरूरी हैं। गर्भधारण के तत्काल बाद महिलाओं को विटामिन बी9 का सेवन करना चाहिए। फोलिक एसिड गोलियों को लेना चाहिए, जोकि सामान्य रूप से उपलब्ध भी हैं।
गुरुवार को नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) और दिल्ली सरकार के जीबी पंत अस्पताल में विश्व स्पाइना बिफिडा दिवस और हाइड्रोसिफेलस दिवस मनाया गया। जीबी पंत अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ डॉ. दलजीत सिंह ने बताया कि जिन महिलाओं में विटामिन की कमी होती है। उनके साथ ये समस्या देखने को मिलती है। ज्यादातर बच्चों में निचले हिस्से की रीढ़ की हड्डी में परेशानी देखने को मिलती है।
देश के ज्यादातर हिस्सों में नहीं है सुविधा
एम्स के बाल सर्जरी विभाग की डॉ. मीनू वाजपेयी का कहना है कि देश के ज्यादातर हिस्सों में गर्भावस्था में महिलाओं की जांच के लिए सुविधाएं नहीं है। अल्ट्रासाउंड, एमआरआई जैसी जांच के लिए कई सौ किमी तक का सफर तय करना पड़ता है। जिसका खामियाजा यह है कि नई पीढ़ी इस बीमारी से ग्रस्त पैदा हो रही है।