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एनडीएमसी के लिए नासूर बने बंदर
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 03 Aug 2014 03:57 AM IST
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दिल्ली के लुटियन जोन को बंदरों से मुक्त कराना एनडीएमसी के लिए नासूर बन गया है। एनडीएमसी के अधिकारी पिछले दो दशक से बंदर भगाने के लिए आधा दर्जन योजनाएं लेकर आए, लेकिन एक भी योजना कामयाब नहीं हुई।
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एनडीएमसी ने शुरू में इलाके से बंदर भगाने के लिए अपने कर्मचारियों को लगाया, मगर योजना कामयाब नहीं हुई, क्योंकि बंदर एक से दूसरे भवन में पहुंच जाते थे।
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इसके बाद लंगूर किराए पर लेकर विभिन्न इमारतों में तैनात किए गए। एनडीएमसी की यह योजना भी नाकाम रही। लंगूर को देखकर बंदर केवल उसके आसपास नहीं आते थे। उसके साथ वाली इमारतों में बंदर हुड़दंग करते रहते थे।
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इन दोनों योजनाओं के नाकाम होने के बाद एनडीएमसी ने करीब एक दशक पहले ऐसे लोगों को अनुबंध के आधार पर नौकरी दी जो लंगूर की आवाज निकालते हैं। यह योजना आज भी चल रही है।
तस्वीरें देखें-इनके रहते संसद को बंदर छू भी नहीं पाएंगे
इसी बीच एनडीएमसी ने रबड़ की गोली छोड़ने वाली गन खरीदी। इस गोली के लगने से बंदर घायल नहीं होता। आवाज और गोली लगने से होने वाले दर्द के चलते वह भाग जाता है। एनडीएमसी ने अब एक नई योजना तैयार की है और एक अन्य योजना को अपनाने पर विचार कर रही है।
एनडीएमसी ने लुटियन जोन स्थित सरदार पटेल मार्ग के साथ और शंकर रोड के दोनों ओर रिज एरिया पर बंदरों की रोकने की योजना पर कार्य करने का फैसला किया है। इसके अलावा इमारतों पर तार के बाड़ लगाकर उनमें हल्का करंट छोड़ने की योजना है।
एनडीएमसी ने बंदरों को रिज एरिया में रखने के लिए 12 लाख रुपये का प्रावधान किया है। वह वहां बंदरों को रोजाना खाना देगी। उनके खाने पर प्रतिमाह एक लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।