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Mohammed Zubair: यूपी में दर्ज एफआईआर रद्द कराने जुबैर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, एसआईटी के गठन को भी दी चुनौती

Fri, 15 Jul 2022 05:53 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Fri, 15 Jul 2022 05:53 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज छह एफआईआर रद्द कराने के लिए मोहम्मद जुबैर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में यूपी पुलिस द्वारा एसआईटी के गठन को भी चुनौती दी गई है।

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Mohammed Zubair reached Supreme Court to cancel FIR registered in UP
मोहम्मद जुबैर (फाइल फोटो) - फोटो : Social media

विस्तार

ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज छह एफआईआर रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। जुबैर के खिलाफ उनके ट्वीट को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गईं है। याचिका में सीतापुर, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर व गाजियाबाद में दर्ज एक-एक और हाथरस में दर्ज दो प्राथमिकी को चुनौती दी गई है। याचिका में यूपी पुलिस द्वारा एसआईटी के गठन को भी चुनौती दी गई है।

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जुबैर को पहली बार 27 जून को उनके द्वारा 2018 में पोस्ट किए गए एक ट्वीट पर दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में यूपी पुलिस द्वारा दर्ज की गई अन्य प्राथमिकी में जुबैर को रिमांड पर लिया गया था। 8 जुलाई को जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी की अवकाशकालीन पीठ ने सीतापुर मामले में मोहम्मद जुबैर को पांच दिन की अंतरिम जमानत दे दी थी। पीठ ने राहत इस शर्त पर दी थी कि वह आगे कोई ट्वीट नहीं करेंगे। इसके बाद 12 जुलाई को जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीतापुर मामले में अंतरिम जमानत अगले आदेश तक के लिए बढ़ा दी थी।

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जुबैर को कड़ी सुरक्षा में पेशी पर लेकर आई दिल्ली पुलिस 
जुबैर को दिल्ली पुलिस बृहस्पतिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच यहां न्यायालय में लाई। जुबैर पर इस जिले में धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में दो मुकदमे दर्ज हैं। एक मुकदमे में सीजेएम कोर्ट ने उसे तलब किया था। ऐसे में कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली पुलिस तिहाड़ जेल से उसे यहां लाई। जुबैर की सीजेएम कोर्ट में पेशी हुई। कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। दिल्ली पुलिस उसे वापस तिहाड़ जेल ले गई।

जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित
पटियाला हाउस कोर्ट अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जांगला ने बृहस्पतिवार को ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर की जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला 15 जुलाई तक के लिए सुरक्षित रख लिया। जुबैर की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट को बताया कि समाचार प्लेटफॉर्म में योगदान की एक्सेल शीट में पाया गया ‘92 पाकिस्तान कोड का संकेत नहीं था, यह गणना के लिए एक सूत्र था। उन्होंने जुबैर के खिलाफ अभियोजन पक्ष के इस आरोप को गलत बताया कि उन्होंने पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देशों से विदेशी योगदान प्राप्त करके एफसीआरए के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। अदालत ने इससे पहले विशेष लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव से पूछा कि क्या आपने उस व्यक्ति का बयान दर्ज किया है? अभी तक आपने बयान ही नहीं लिया है, आपने कितने बयान दर्ज किए हैं? कितने लोगों ने ट्वीट  से नाराजगी महसूस की। 

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