पांच करोड़ के जुर्माने के बाद श्रीश्री को मिली यमुना किनारे आयोजन की अनुमति
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दिल्ली में होने जा रहे आर्ट ऑफ लिविंग के भव्य आयोजन को आखिरकार यमुना किनारे करने की इजाजत मिल गई है। एनजीटी ने कार्यक्रम की अनुमति देने के साथ ही 5 करोड़ रुपए का जु्र्माना लगाया है।
इसके अलावा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली प्रद्रूषण कमेटी पर एक लाख और डीडीए पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। एनजीटी ने आदेश दिया है कि कार्यक्रम के बाद आयोजकों को आयोजन स्थल की सफाई भी करनी होगी। बताया जा रहा है कि आयोजन को लेकर की गई शिकायत में देरी हुई, जबकि दूसरी ओर तैयारियां चलती रही। इसका फायदा आर्ट ऑफ लिविंग को मिला। ऐसे में अब जुर्माने के साथ इसका आयोजन किया जा रहा है।
इससे पहले आज दिन भर इस कार्यक्रम को लेकर लगातार विवाद होता रहा। जहां एक ओर एनजीटी और कोर्ट सख्त थे वहीं दूसरी ओर विपक्ष भी सरकार के खिलाफ इस मुद्दे को भुनाने में जुटा था। एनजीटी ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी विभागों को जमकर फटकार लगाई। एंजाइम के इस्तेमाल पर सवाल पूछा गया और यह भी कहा कि क्या कभी अनुमति के बगैर इतना बड़ा आयोजन होते देखा है? चौकाने वाली बात यह है कि इस कार्यक्रम को लेकर सभी विभाग पल्ला झाड़ते नजर आ रहे थे।
दिल्ली पुलिस ने भी उठाए मंच को लेकर सवाल
कार्यक्रम में सेना के इस्तेमाल को लेकर भी खूब घमासान हुआ। विपक्षी दलों ने रक्षा मंत्री पर सेना के दुरुपयोग का आरोप लगाया। बता दें कि सेना ने आयोजन की तैयारियों में सहयोग किया और पैंटून पुल बनाए। सेना के पास कम समय में पैंटून पुल बनाने की क्षमता है। राज्यसभा में सीताराम येचुरी ने सवाल उठाया था कि आखिर एक निजी संस्था के कार्यक्रम में सेना को पुल बनाने के काम में क्यों लगाया गया।
यमुना सुरक्षा की चिंता को लेकर विपक्ष ने भाजपा पर हमला बोला तो राज्यसभा में सरकार के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने इस कार्यक्रम की वकालत की। विपक्ष के सवालों का जवाब का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम हर नियम कानून के दायरे में हो रहा है। नकवी आगे बोले कि रविशंकर पर्यावरण को लेकर प्रतिबद्ध रहे हैं और उनकी मंशा पर शक करना ठीक नहीं होगा।
राज्यसभा में विपक्ष ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। सेना के गलत इस्तेमाल को लेकर विपक्ष ने 'आर्मी का गलत इस्तेमाल मत करो, रक्षा करो' का नारा लगाया। इसके बाद अरुण जेटली ने मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि यह मामला एनजीटी के अधीन है और इसलिए इस विषय पर सदन में चर्चा करना उचित नहीं होगा।
दिल्ली में यमुना किनारे हो रहे इस कार्यक्रम पर देश के कई पर्यावरणविदों ने यह कहकर सवाल उठाया था कि इस कार्यक्रम से यमुना में प्रदूषण और बढ़ जाएगा व यमुना नदी इस कार्यक्रम से बुरी तरह प्रभावित होगी।
सेना के इस्तेमाल पर हुई नारेबाजी
जबकि दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया था कि आयोजन में पीएम के लिए अलग स्टेज बनाया जा रहा है। हालांकि जब सुनवाई के दौरान बेंच ने दिल्ली सरकार और जल संसाधन मंत्रालय से पूछा कि समारोह के लिए पानी की जरूरतों को कहां से पूरा किया जाएगा और पानी का स्रोत क्या है तो आर्ट ऑफ लिविंग के ओर से पक्ष रखा गया था।
संस्था ने कहा था कि समारोह में 2 लाख लोग आएंगे और किसी भी खास समय लोगों की अधिकतम संख्या 5 लाख हो सकती है।दिल्ली पुलिस ने भी इस कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जो मंच बनाया गया है वह सुरक्षित नहीं है दिल्ली पुलिस ने कहा 1 मार्च को की गई जांच में ये खुलासा किया कि 7 पैंटून पुल बनाए जाने की बात कही जा रही थी लेकिन अभी तक 1 ही बना है और दूसरे पर काम चल रहा है।
सुरक्षा की दृष्टि से भी पूरे इंतजाम नहीं किए गए हैं और सीपीडब्ल्यूडी, डीडीए या दिल्ली पीडब्ल्यूडी से भी कोई सर्टिफिकेट नहीं लिया गया है।