जेवर एयरपोर्ट का शिलान्यास कर सकते हैं मोदी, स्टीयरिंग कमेटी के पास पहुंची फाइल
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जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए क्षेत्र के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। 30 जून को रक्षा मंत्रालय का पत्र मिलने के बाद सिविल एविएशन की स्टीयरिंग कमेटी के पास प्रोजेक्ट की फाइल पहुंच गई है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट का शिलान्यास व अरनिया में तैयार हो रहे बिजली घर का उद्घाटन कराया जाएगा।
जेवर एयरपोर्ट के लिए प्रदेश सरकार की हामी के बाद उड्डयन मंत्रालय ने तेजी से काम किया। 30 जून को रक्षा मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी टू दा गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एएस चौधरी की तरफ से मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन को पत्र जारी कर दिया गया।
अब उड्डयन विभाग की स्टीयरिंग कमेटी के पास प्रोजेक्ट की फाइल पहुंच गई है, शीघ्र ही प्रोजेक्ट के लिए हरी झंडी मिलने की संभावना है। मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि प्रोजेक्ट पर करीब 12,000 करोड़ रुपये का खर्च आना है। जेवर में एयरपोर्ट बनने से गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़, अलीगढ़, हाथरस मथुरा, आगरा आदि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए काफी लाभदायक होगा।
एनओसी की जरूरत नहीं
एयरपोर्ट के लिए रक्षा मंत्रालय की एनओसी की दरकार नहीं है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी पत्र में इसका उल्लेख किया गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से 6 अप्रैल को रक्षा मंत्रालय से पूछा गया था कि जहां एयरपोर्ट प्रस्तावित किया गया है, वह भारतीय वायुसेना की जमीन तो नहीं है या प्रतिबंधित क्षेत्र में तो नहीं है। इस पर रक्षा मंत्रालय ने कहा कि प्रस्तावित जगह वायुसेना की परिधि में नहीं है इसलिए एनओसी दी जा सकती है। जब प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा तो रक्षा मंत्रालय से अनुमति लेनी होगी।
चुनाव के पहले मोदी फिर नोएडा में
सूत्र बताते हैं कि जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए मोदी से भी बात की गई है। विधानसभा चुनाव से पहले एयरपोर्ट प्रोजेक्ट का शिलान्यास करने की तैयारी है। साथ ही, अरनिया में बिजली घर भी बनकर तैयार हो रहा है, उसका उद्घाटन भी होना है।
30 दिसंबर 2015 और 6 अप्रैल 2016 में पीएम नोएडा आ चुके हैं। तीसरी बार उन्हें लाने की तैयारी है। प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश सरकार पहले ही सहमति दे चुकी हैं। सपा सरकार भी मानती है कि अगर चुनाव से पहले प्रोजेक्ट का शिलान्यास हो जाएगा तो संदेश जाएगा कि सपा का चुनावी मुद्दा सिर्फ विकास ही है।
दिल्ली एयरपोर्ट पर बढ़ रहा दबाव
जेवर में 35 गांवों की 2500 एकड़ जमीन भी एयरपोर्ट के लिए यमुना प्राधिकरण ने आरक्षित कर रखी है। दिल्ली के एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है। जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए करीब पांच साल का समय लगेगा। जब तक दिल्ली में एयर ट्रैफिक की हालत बेहद खराब होगी।
जेवर एयरपोर्ट: एक नजर
- 2001 में प्रदेश की भाजपा सरकार ने प्रस्ताव तैयार किया।
- 2003 में जेवर में प्रोजेक्ट के लिए जगह निर्धारित की गई।
- 2007 में बसपा सरकार ने यमुना प्राधिकरण के 35 गांवों की करीब 2471 एकड़ जमीन रिजर्व कर मास्टर प्लान तैयार किया।
- 2010-टी रामबोल के नेतृत्व में एक टीम गठित, करीब 5000 करोड़ खर्च का अनुमान। 74 फीसदी निजी और शेष खर्च सरकार का।
- 2011-उड्डयन विभाग, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, दिल्ली एयरपोर्ट से दूरी 72 या 120 किलोमीटर के विवाद सुलझाकर 90 किलोमीटर तय कर दी गई।
- 2012 में सपा सरकार बनते ही प्रोजेक्ट को निरस्त कर दिया गया।
- 2013 में आगरा कुशीनगर में एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया।
- 2014 में रक्षा मंत्रालय ने प्रस्ताव को नकार दिया।
- 26 मई 2015 को प्रदेश सरकार ने आगरा व हिरनगांव में एयरपोर्ट बनाने को पत्र भेजा।
- 27 जून 2015- उड्डयन विभाग, पवन हंस, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, एयर इंडिया समेत अन्य विभाग के अधिकारियों ने एनसीआर में दूसरा एयरपोर्ट को लेकर गहन चर्चा की थी। जिसमें जेवर ही उपयुक्त जगह माना।
- 7 जुलाई 2015 को सैफई, बाह तहसील की भदरौली व जेवर में एयरपोर्ट बनाने के लिए सीएम ने पीएम को पत्र लिखा।
- 30 जून 2016 को रक्षा मंत्रालय की तरफ से मिली एनओसी।