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बजट से उम्मीद: इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बने ग्रेनो
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Updated Sun, 06 Jul 2014 01:53 AM IST
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रेल बजट से उम्मीदें लगाए बैठे उद्यमी चाहते हैं कि सरकार ग्रेटर नोएडा को जल्द से जल्द इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाए।
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उनका कहना है कि ऐसा करने से ग्रेनो में रेल के जरिए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और कारोबार बढ़ेगा। ग्रेनो में उद्यमी और व्यापारी हर माह करीब पांच सौ करोड़ का कारोबार कर रहे हैं।
यहां से मुंबई, कोलकाता, पंजाब समेत अनेक राज्यों में माल भेजा और मंगाया जाता है। इनकी मांग है कि रेल बजट में उद्योग-धंधा करने वालों के हितों का ख्याल रखा जाए।
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रेलवे बजट से काफी उम्मीदें हैं। दोबारा मालभाड़ा बढ़ाए जाने की कोई जरूरत नहीं है। पहले से ही उद्योग-धंधे घाटे में चल रहे हैं। ऊपर से माल भाड़े में फिर से बढ़ोतरी की गई तो कमर टूट जाएगी।
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- एडी पांडेय, अध्यक्ष इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
ग्रेनो में इंडस्ट्रियों की स्थिति ठीक नहीं है। उम्मीद है कि मोदी सरकार में उद्यमियों के अच्छे दिन आएं। सरकार रेल बजट में यात्री किराये और माल भाड़े में बढ़ोतरी करती है, तो इंडस्ट्री पर अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा।
- पीएस चौहान, उद्यमी
रेल बजट हो या आम बजट, सरकार को ऐसी घोषणाएं करनी चाहिए कि इसका दूरगामी असर पड़े। उद्योग जगत को सरकार से मदद की दरकार है। उद्योग लगाने वालों को सरकार विशेष ऋण दे। बिजली कटौती नहीं की जाए, इससे उत्पादन पर असर पड़ता है।
-पीके तिवारी, उद्यमी
यह सुन रहे थे कि उद्योग-धंधों के लिए अच्छे दिन आनेवाले हैं। अब यह देखने की बात होगी की रेल बजट में इस वादे का कितना प्रभाव रहता है। व्यापार के लिए लोगों की उम्मीद मोदी सरकार से लगी है कि कुछ बेहतर सामने आएगा।
- मुकेश, उद्यमी
आज उद्योग की स्थिति बेहतर नहीं है। कारोबार को बढ़ाने में सरकार को मदद करनी चाहिए। वर्ना इंडस्ट्री को और बुरे दिन देखने पड़ेंगे। मोदी से कई अपेक्षाएं हैं। सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए कि उद्योग-धंधे बच सकें।
- महेश त्यागी, उद्यमी
इस बात की संभावना है कि रेल बजट उद्यमियों के लिए भी बेहतर होगा। सबकी नजरें इस पर टिकी हुई हैं। सरकार को चाहिए कि दिल्ली वाया ग्रेनो को भी रेल मार्ग से जोड़ा जाए। अभी तक दादरी से ही माल आता-जाता है।
- अनिल गर्ग, उद्यमी
कुछ दिन पहले रेलभाड़े में बढ़ोतरी की गई, जिसकी उद्यमियों ने भी आलोचना की थी। रेल बजट में सरकार अगर मालभाड़े में बढ़ोतरी करती है, तो बोझ बढ़ जाएगा। वैसे सरकार ने अच्छे दिन का दावा किया था, अभी ऐसा नहीं दिखाई दे रहा है।
- विपिन, उद्यमी
उद्यमियों को हर बार सरकार ने छलने का काम किया है। इस बार भी लगता है कि सरकार छलेगी ही। सबकी निगाहें पेश होने वाले बजट पर हैं। बजट ऐसा होना चाहिए कि हम सबको राहत मिले।
- बीआर भाटी, उद्यमी