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UP: आधुनिक तकनीकी से होगी मृतकों की पहचान, भुवनेश्वर रेल हादसे में शवों की पहचान न हो पाने से लिया सबक
Sat, 24 Feb 2024 10:48 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: श्याम जी.
Updated Sat, 24 Feb 2024 10:48 PM IST
सार
दुर्घटना व अपराध में दम तोड़ने वाले मृतकों की पहचान जल्द करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। सफदरजंग अस्पताल में फॉरेंसिक ओडोंटोलॉजी के विषय पर गहन चर्चा हुई।
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सफदरजंग अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दुर्घटना व अपराध में दम तोड़ने वाले मृतकों की पहचान जल्द करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। भुवनेश्वर में हुए रेल हादसे के बाद लंबे समय तक पीड़ितों की पहचान नहीं हो पाई थी। इसके बाद आपदा पीड़ित की पहचान (डीवीआई) को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत पोस्टमार्टम में कई तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। शनिवार को सफदरजंग अस्पताल में फॉरेंसिक ओडोंटोलॉजी के विषय पर गहन चर्चा हुई। इसमें सफदरजंग, एम्स व मौलाना आजाद दंत विज्ञान संस्थान के डाक्टरों ने मृतक की पहचान के लिए बड़ी घटनाओं में दांत व जबड़े के डीएनए के बारे में चर्चा की।
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इस दौरान स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक अतुल गोयल ने कहा कि भुवनेश्वर में हुए हादसे के बाद शवों की पहचान करना मुश्किल हो गया था। यह बड़ा हादसा था। इसमें लंबे समय तक पहचान के लिए पीड़ितों के शव की जांच करनी पड़ी। ऐसे हादसों को देखते हुए आपदा को लेकर ट्रेनिंग दी जा रही है। सफदरजंग अस्पताल के फॉरेंसिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सर्वेश टंडन ने कहा कि डेंटल व फारेंसिक विभाग अभी अलग-अलग काम कर रहा है। शवों की जल्द पहचान के लिए दोनों विभागों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे पुलिस को आपराधिक मामलों, हादसे के पीड़ित व आरोपितों को पहचानने में मदद मिलेगी।
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इस मौके पर डॉ. दीपिका मिश्रा ने कहा कि दांत के डीएनए से व्यक्ति की उम्र, लिंग सहित अन्य की पहचान हो सकती है। दांत फिंगर प्रिंट की तरह सभी में अलग होते हैं। यह कभी दूसरे से मेल नहीं खाते। श्रद्धा हत्याकांड में दांत में लगे इंप्लांट से बाडी की पहचान करने में मदद मिली थी। दुष्कर्म के मामलों में पीड़ितों के शरीर पर दांत काटने के निशान होने पर उससे आरोपी की पहचान में मदद मिलती है। निर्भया कांड में भी दांत काटने के निशान से आरोपी तक पहुंचने में मदद मिली थी।
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एम्स के फॉरेंसिक विभाग के प्रोफेसर डॉ. चित्तरंजन का कहना है कि बहुत खराब हुए शव की पहचान में दांत और जबड़े का डीएनए सबसे बेहतर विकल्प है। दांत व जबड़े की हड्ड़ी लंबे समय तक खराब नहीं होती। भुवनेश्वर रेल हादसे में दांत व जबड़े के सैंपल लेकर डीएनए प्रोफाइलिंग की गई थी। केंद्रीय फारेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएसएफएल) व एम्स ने मिलकर डीएनए प्रोफाइलिंग की थी।