ऐसे उड़ रहा आरटीआई का माखौल, 4250 जमा कराओ फिर मिलेगी सूचना
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आरटीआई एक्ट मेवात में बेमानी साबित हो रहा है। जिले के सरकारी कार्यालयों में लंबित सैंकड़ों आरटीआई के आवेदन रद्दी के कागज साबित हो रहे हैं। कुछ आवेदनों का जवाब भी मिलता है तो वह सच्चाई से परे होता है, तो कुछ आवेदनों पर सूचना देने से बचने के लिए नए-नए बहाने गढ़े जा रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला नूंह बीडीपीओ ऑफिस में सामने आया है। सरपंच द्वारा जारी किए गए पत्र में 4250 रुपये 3 दिन में जमा कराने को कहा गया है। नूंह के कुर्थला गांव निवासी देवेंद्र पुत्र जयभगवान ने बीडीपीओ को आरटीआई देकर ग्राम पंचायत कुर्थला के बारे में 11 सूचनाएं मांगी थीं।
जिनमें कुछ सूचनाएं गांव में पेयजल सप्लाई के लिए नियुक्त पंप ऑपरेटर की नियुक्ति तथा उसके वेतन से संबंधित थीं। देवेंद्र के मुताबिक सभी सूचनाएं अधिक से अधिक 15 या 20 पेज की हैं। जिसके लिए उसने एप्लीकेशन के साथ 50 रुपये का पोस्टल ऑर्डर लगाया था।
प्रति पेज दो रुपये होती है फीस
जब उसकी एप्लीकेशन को बीडीपीओ कार्यालय से सरपंच के पास भेजा गया तो उसने एक सीधा लेटर उसे वापिस भेज दिया। जिसमें सरपंच ने कहा कि मांगी गई सूचनाओं के लिए प्रति पेज के हिसाब से 4 हजार 250 रुपये बनते हैं। जिसे वह जमा करा कर सरपंच से रसीद प्राप्त करें। उसके बाद ही सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
प्रति पेज दो रुपये होती है फीस
आरटीआई एक्ट के तहत सूचना देने के लिए दो रुपये प्रति पेज फीस वसूल करने का प्रावधान है। प्रत्येक एप्लीकेशन के साथ कम से कम दस रुपये का पोस्टल ऑर्डर लगाना जरूरी होता है। यदि इससे अधिक फीस वसूल की जाती है तो वह गैर कानूनी है। इतना ही नहीं यदि सूचना मांगने वाले व्यक्ति ने एप्लीकेशन के साथ कम राशि का पोस्टल ऑर्डर लगाया है, जबकि सूचना के पेज अधिक बनते हैं तो सूचना उपलब्ध कराने के बाद उसकी डिमांड की जानी होती है।
800 पेज से अधिक मांगी गई सूचना
कुर्थला के सरपंच का कहना है कि मांगी गई सूचना के पेज 800 से अधिक बनते हैं। हमें बताया गया है कि प्रति पेज पांच रुपये वसूल किए जाने होते हैं। जिसके कारण हमने सूचना देने के लिए 4 हजार 250 रुपये की डिमांड की है।