Delhi AIIMS: एम्स में नहीं टूटेगा मोबाइल सिग्नल, 5 जी से होगा लैस, 30 जून तक विकसित होगी सुविधा
एम्स में हर दिन 50 हजार से ज्यादा लोग आते हैं। इनके लिए अच्छी मोबाइल कनेक्टिविटी की जरूरत है। मौजूदा समय में खराब मोबाइल कनेक्टिविटी के कारण कई बार मरीज, तीमारदार व डॉक्टरों को परेशानी होती है।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में मोबाइल का सिग्नल साथ नहीं छोड़ेगा। निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास के आदेश पर एम्स परिसर में 30 जून तक 5 जी कनेक्टिविटी की सुविधा देने के लिए डॉक्टरों की कमेटी बनाई गई है।
एम्स में हर दिन 50 हजार से ज्यादा लोग आते हैं। इनके लिए अच्छी मोबाइल कनेक्टिविटी की जरूरत है। मौजूदा समय में खराब मोबाइल कनेक्टिविटी के कारण कई बार मरीज, तीमारदार व डॉक्टरों को परेशानी होती है। अधिकांश जगहों पर 3जी-4जी डेटा कनेक्टिविटी है। संस्थान की इमारतों में 5जी कनेक्टिविटी लगभग शून्य है। इस समस्या को देखते हुए रोगी की देखभाल, शिक्षण, अनुसंधान, सुशासन और एकीकृत चिकित्सा विश्वविद्यालय सूचना प्रणाली (आईएमयूआईएस) व आधुनिक संचार प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग को सक्षम बनाने के लिए एम्स को परिसर 5 जी कनेक्टिविटी बनाने की जरूरत है।
ई-चिकित्सा सेवा होगी मजबूत
5जी कनेक्टिविटी से एनसीआई झज्जर सहित अन्य मुख्य और आउटरीच परिसरों में ई-कैजुअल्टी और ईआईसीयू समाधानों के कार्यान्वयन में भी मदद मिलेगी। साथ ही वरिष्ठ संकाय को ऑफ ड्यूटी, छुट्टियों आदि के दौरान भी अपनी विशेषज्ञ सलाह प्रदान करने में सक्षम बनाएगी।
समिति में ये हैं शामिल
एम्स की पांच सदस्य समिति में प्रो. विवेक टंडन, (न्यूरोसर्जरी विभाग) अध्यक्ष होंगे। सुनीता चेरोडाथ, (सीनियर उप महानिदेशक, दूरसंचार विभाग), डॉ. विवेक गुप्ता, (कंप्यूटर सुविधा), जितेन्द्र सक्सेना, (अधीक्षण अभियंता), डॉ. विकास सदस्य व अन्य पद पर होंगे।
20 मार्च तक करेगी जांच
समिति 20 मार्च तक 5जी मोबाइल सेवा प्रदाताओं के लिए ईओआई जारी करेगी। 15 अप्रैल तक कंपनी एम्स परिसर का सर्वेक्षण कर अपनी रिपोर्ट देगी। उसके आधार पर टेंडर होगा, जिसके आधार पर परिसर 30 जून से पहले पूरी तरह से 5जी सक्षम होगा।