पुलिस हिरासत से आरोपी छुड़ाने के आरोप में विधायक सुखबीर बरी
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अदालत ने आम आदमी पार्टी के विधायक सुखबीर सिंह दलाल और दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। इन पर 2015 में नांगलोई थाने से एक आरोपी को महाराष्ट्र पुलिस की हिरासत से भगाने का आरोप था। कोर्ट ने पाया है कि पूरा घटनाक्रम फर्जी था और उन्हें फंसाया गया था।
राउज अदालत के एसीएमएम समर विशाल ने आरोपियों को बरी करते हुए दिल्ली पुलिस की खिंचाई की। अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष ने जो भी दलीलें पेश की हैं उससे यह साबित होता है कि घटना पूरी फर्जी और बनावटी है।
पेश मामले में आरोपियों के बरी होने में महाराष्ट्र पुलिस के एएसआई की डायरी ने अहम भूमिका निभाई। कोर्ट ने कहा है कि एएसआई ने डेली डायरी में इस बात का साफ जिक्र किया है कि तोमर जांच में शामिल हुआ था और उसे यह कहकर सुखबीर सिंह दलाल के हवाले किया गया था कि उन्हें अगले दिन भी थाने आना है।
अदालत ने कहा कि इस डायरी से साफ हो जाता है कि तोमर को जबरन छुड़ाने या मौके से खिसक लेने की अभियोजन पक्ष की दलील पूरी तरह गलत है।
जांच अधिकारी ने डायरी में दर्ज एंट्री को जानबूझकर छिपा लिया। इसलिए अदालत ने पुलिस की सभी दलील खारिज करते हुए तीनों आरोपियों रोहताश तोमर, राजेश उर्फ राजे और सुखबीर सिंह दलाल को बरी कर दिया है।
दिल्ली पुलिस का आरोप था कि मुंडका से आप विधायक सुखबीर दलाल 8 जुलाई 2015 को अपने 30-40 समर्थकों के साथ नांगलोई थाने में घुसे थे।
विधायक ने वहां जाकर रोहताश तोमर नामक शख्स को छोड़ने का पुलिस पर दवाब बनाया। रोहताश तोमर को महाराष्ट्र पुलिस ने कथित तौर पर प्लास्टिक ग्रैन्यूल खरीदने के आरोप में पकड़ा था। पुलिस आरोपों को कोर्ट में साबित नहीं कर सकी।
पुलिसकर्मी से दुर्व्यवहार के आरोप से आप विधायक बरी
दालत ने रोहताश नगर से आप विधायक सरिता सिंह को पुलिसकर्मी से दुर्व्यवहार व धमकी देने के आरोपों से बुधवार को बरी कर दिया। मामला 2015 में रोहताश नगर में विधायक के चालक व पुलिसकर्मी के बीच कार व बाइक टच करने को लेकर शुुरू हुआ था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 2015 में सरिता सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
राउज एवेन्यू अदालत के एसीएमएम समर विशाल ने आप विधायक को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने सरिता सिंह को 20 हजार का निजी मुचलका भरने का आदेश दिया है, ताकि फैसले के खिलाफ अपील होने पर उनकी हाजिरी सुनिश्चित की जा सके।
पेश मामले में सरिता सिंह की कार बैक करते समय चालक के हाथों एएसआई से टकरा गई थी। इसके बाद चालक व एएसआई के बीच बहस हुई। इसमें दखल देते हुए विधायक ने दखल किया और कथित तौर पर एएसआई को अपशब्द कहे और उसे धमकी दी।