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रजिस्ट्री के लिए विधायक ने मांगी जेल से छुट्टी
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 24 Feb 2016 01:17 AM IST
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हत्या के मामले में जेल में बंद एक पूर्व विधायक ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के रजिस्ट्री कैंप में आने के लिए कोर्ट से पेरोल की अर्जी लगाई।
इस पर कोर्ट ने जीडीए को पत्र लिखकर रजिस्ट्री कैंप में आने की अनिवार्यता की जानकारी ले ली। जीडीए अधिकारियों ने कोर्ट को सूचित कर दिया है कि रजिस्ट्री कैंप में रजिस्ट्री कराना स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं।
यह रजिस्ट्री बाद में भी कराई जा सकती है। दूसरी ओर, जीडीए अधिकारियों ने बुधवार से विधायकों और मंत्रियों के लिए विशेष रूप से लगाए जा रहे रजिस्ट्री कैंप की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।
2007 के विधानसभा में चुने गए 279 विधायकों को जीडीए ने 2010 में मधुबन-बापूधाम योजना में 300 वर्गमीटर के प्लाटों का आरक्षण किया था। इनमें से पांच विधायकों ने प्लाट लेने से इंकार कर दिया था।
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बाकी विधायकों में से महज 30 ने ही अपने प्लाटों की रजिस्ट्री कराई है। इतनी बड़ी संख्या में रजिस्ट्री लंबित होने के कारण जीडीए ने विशेष कैंप लगाने का फैसला किया।
जीडीए ने प्लैट लेने वाले सभी विधायकों को कैंप में आकर रजिस्ट्री कराने के लिए पत्र भेजा था। इसी पत्र को आधार बनाकर विधायक ने पेरोल मांगा था।
जीडीए अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया कि करीब 15 से 20 विधायकों ने कैंप से पूर्व रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की है।
पत्नियों को लेकर आना होगा साथ
8 मार्च 2001 के शासनादेश में यह स्पष्ट किया गया है कि प्राधिकरण की संपत्तियों की रजिस्ट्री के समय पति या पत्नी (जैसी स्थिति हो) का नाम रजिस्ट्री में अवश्य डाला जाए।
इन भूखंडों की रजिस्ट्री में पत्नी और पत्नी का नाम संयुक्त रूप से शामिल किया जाना है। विधायकों को रजिस्ट्री के लिए सपत्नीक आने के लिए पत्र भेजे गए हैं। विवाह विच्छेद, निधन आदि की अवस्था में इससे संबंधित दस्तावेज जमा कराने होंगे।
रजिस्ट्री में आएगा करीब सात लाख का खर्च
जीडीए ने विधायकों को करीब 35 लाख रुपये में यह प्लाट आवंटित किया है। रजिस्ट्री शुल्क करीब 2.50 लाख के अलावा फ्रीहोल्ड शुल्क, कोर्ट फीस आदि मिलाकर यह रकम पांच से सात लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इस कारण भी बड़ी संख्या में विधायक कैंप में न आ पाने के कारण बता रहे हैं।
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इस पर कोर्ट ने जीडीए को पत्र लिखकर रजिस्ट्री कैंप में आने की अनिवार्यता की जानकारी ले ली। जीडीए अधिकारियों ने कोर्ट को सूचित कर दिया है कि रजिस्ट्री कैंप में रजिस्ट्री कराना स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं।
यह रजिस्ट्री बाद में भी कराई जा सकती है। दूसरी ओर, जीडीए अधिकारियों ने बुधवार से विधायकों और मंत्रियों के लिए विशेष रूप से लगाए जा रहे रजिस्ट्री कैंप की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।
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2007 के विधानसभा में चुने गए 279 विधायकों को जीडीए ने 2010 में मधुबन-बापूधाम योजना में 300 वर्गमीटर के प्लाटों का आरक्षण किया था। इनमें से पांच विधायकों ने प्लाट लेने से इंकार कर दिया था।
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बाकी विधायकों में से महज 30 ने ही अपने प्लाटों की रजिस्ट्री कराई है। इतनी बड़ी संख्या में रजिस्ट्री लंबित होने के कारण जीडीए ने विशेष कैंप लगाने का फैसला किया।
जीडीए ने प्लैट लेने वाले सभी विधायकों को कैंप में आकर रजिस्ट्री कराने के लिए पत्र भेजा था। इसी पत्र को आधार बनाकर विधायक ने पेरोल मांगा था।
जीडीए अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया कि करीब 15 से 20 विधायकों ने कैंप से पूर्व रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की है।
पत्नियों को लेकर आना होगा साथ
8 मार्च 2001 के शासनादेश में यह स्पष्ट किया गया है कि प्राधिकरण की संपत्तियों की रजिस्ट्री के समय पति या पत्नी (जैसी स्थिति हो) का नाम रजिस्ट्री में अवश्य डाला जाए।
इन भूखंडों की रजिस्ट्री में पत्नी और पत्नी का नाम संयुक्त रूप से शामिल किया जाना है। विधायकों को रजिस्ट्री के लिए सपत्नीक आने के लिए पत्र भेजे गए हैं। विवाह विच्छेद, निधन आदि की अवस्था में इससे संबंधित दस्तावेज जमा कराने होंगे।
रजिस्ट्री में आएगा करीब सात लाख का खर्च
जीडीए ने विधायकों को करीब 35 लाख रुपये में यह प्लाट आवंटित किया है। रजिस्ट्री शुल्क करीब 2.50 लाख के अलावा फ्रीहोल्ड शुल्क, कोर्ट फीस आदि मिलाकर यह रकम पांच से सात लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इस कारण भी बड़ी संख्या में विधायक कैंप में न आ पाने के कारण बता रहे हैं।