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भारत बंद का मिला जुला असर, देर शाम के बाद ही खुदरा व थोक बाजार में खरीदारों की संख्या बढ़ी

Wed, 09 Dec 2020 01:03 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 09 Dec 2020 01:03 AM IST
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Mixed effect of Bharat bandh number of buyers increased in retail and wholesale market after late evening
आजादपुर मंडी - फोटो : amar ujala

भारत बंद का दिल्ली पर मिला जुला असर रहा। तीन बजे के चक्का जाम की वजह से सड़कों पर वाहनों की संख्या थोड़ी कम रही, लेकिन शाम के वक्त फिर सड़कों पर वाहनों की कतार लगने लगीं। सड़कों पर पूरे दिन क्लस्टर और डीटीसी की बसें दौड़ीं। 

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सुबह के वक्त चक्का जाम होने के बावजूद सड़कों पर ऑटो, बसें और निजी वाहन फर्राटा भरते दिखे। चक्का जाम होने की वजह से साढ़े तीन बजे के बाद टैक्सी और कैब भी चलने लगीं। धौला कुआं, मोती नगर, कीर्ति नगर, इंद्रलोक, ब्रिटानिया, सरस्वती विहार, जीटी करनाल रोड तक वाहनों का आवागमन सामान्य रहा। 
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बॉर्डर पार जाने वालों को दो किलोमीटर तक चलना पड़ा पैदल, परेशानी 

सिंघु बॉर्डर पर किसानों की मौजूदगी और बॉर्डर सील होने की वजह से सुरक्षा के लिहाज से बसें करीब दो किलोमीटर पहले ही दिल्ली के लिए लौट गईं। इस वजह से यात्रियों को बॉर्डर पार करने के लिए पैदल चलना पड़ा। इस दौरान सड़क पर ऑटो और ई रिक्शा भी थे, लेकिन कम। अंतरराज्यीय बसें कश्मीरी गेट से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश व जम्मू के लिए नहीं गई, जिससे उन राज्यों में जाने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। 
 
भारत बंद का असर:दुकानें खुली लेकिन ग्राहकों की संख्या में भारी कमी

दुकानें तो खुली, लेकिन बाजार में ग्राहकों की संख्या रही कम वहीं सीमा पर चल रहे विरोध-प्रदर्शन की वजह से दिल्ली के बाजारों में पड़ोसी राज्यों से आने वाले खरीदार भी नदारद रहे। कुछ बाजारों ने किसानों की मांग के समर्थन में काली पट्टी लगाकर अपना व्यापार किया, उधर, दिल्ली की मंडियों भी आजादपुर मंडी को छोड़ अन्य जगहों पर बंद का बहुत ज्यादा असर नहीं दिखा। व्यापारियों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण बाजार वैसे भी इनदिनों सूना रहता है बंद के कारण और अधिक सन्नाटा रहा। 

आजादपुर मंडी में दोपहर बाद पसरा सन्नाटा
किसान आंदोलन के समर्थन में बुलाए गए भारत बंद का दिल्ली के आजादपुर मंडी पर खासा असर देखने को मिल रहा है। आम दिनों की तुलना में आवक भी काफी कम रही। हालांकि कई आढ़तियों ने सुबह के वक्त दुकान खोल बाहर से आए आवश्यक वस्तुओं की बिक्री की। 

आजादपुर मंडी समिति ने बंद का समर्थन किया था। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन और किसानों के विरोध के चलते सामान पहले से ही मंडी में कम पहुंच रहा था, मंगलवार को भी आजादपुर मंडी में न तो उस तरह की भीड़ थी और ना ही चहल-पहल। जैसी कि आम दिनों में होती है। आढ़तियों के मुताबिक किसान आंदोलन के चलते पहले ही सब्जियों और फलों की आवक आधी हो गई है, बंद की वजह से काफी कम संख्या में ट्रक मंडी में पहुंचे। आढ़तियों का यह भी कहना है कि बंद की वजह से एक दिन पहले ही माल की आवक ज्यादा रही। 

गाजीपुरमंडी के प्रधान सुरेंद्र गोस्वामी ने बताया कि बंद का मिलाजुला असर व्यापार पर रहा। सुबह के वक्त ग्राहक पहुंचे, लेकिन ट्रकों की आवक सुबह में कम रही। सोमवार रात को ही ट्रक पहुंच गई थी। उधर केशवपुर व ओखला मंडी में भी दुकानें खुली रही। बंद का व्यापक असर नहीं दिखा।

खुदरा बाजार में नहीं हुई परेशानी

दिल्ली बंद की वजह से आजादपुर मंडी में भले ही अन्य दिनों की तरह रौनक नहीं रही, लेकिन इसका असर खुदरा बाजार पर नहीं पड़ा। गली-मुहल्लों में रेहड़ी पर बिकने वाली सब्जियों में कोई कमी नहीं रहे। ठेला पर बिक्री करने वाले विक्रेता सुबह ही मंडी पहुंचकर हरी सब्जियों की खेप लेकर आ गए थे। बंद की अपील पहले होने की वजह से आलू-प्याज भी स्टोर कर लिया गया था, लिहाजा सब्जियों की कोई कमी नहीं दर्ज की गई। दुकानें भी हर तरफ फल व सब्जियों की खुली रही।

काली पट्टी बांधकर समर्थन किया
दिल्ली के मशहूर बाजारों में से एक सरोजिनी नगर मार्केट में दुकानें तो हर रोज की तरह ही मंगलवार को भी खुली रही। लेकिन भारत बंद का असर बाजार के दुकानदारों पर भी देखने को मिला। किसानों की मांग के समर्थन में सरोजिनी नगर मार्केट के दुकानदार काली पट्टी बांधकर किसानों के भारत बंद को अपना समर्थन दिया।

दुकानदारों ने कहा कि बाजार को बंद करके आम लोगों की दिक्कतों को वह बढ़ाना नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने दुकानें खुली रखी। दबाव डालने का ये एक सांकेतिक विरोध का जरिया था। सरोजिनी नगर मिनी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक रंधावा ने कहा कि बाजार को पूरी तरह से बंद करने पर आम लोगों को जरूरत का सामान नहीं मिल पाता। कोरोना के चलते कफी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए बंद समस्या का समाधान नहीं है। इसी तरह सदर बजार, लाजपत नगर, कनॉट प्लेस, करोल बाग, गांधी नगर, वजीरपुर, कमलानगर, नेहरू प्लेस समेत अन्य मार्केट भी खुले रहे। 

थोक बाजार भी खुले रहे
सदर बाजार, गांधी नगर समेत अन्य बाजार में भी भारत बंद का असर तो दिखा, लेकिन बाजार बंद नहीं थे। दुकानें खुली रही, लेकिन अन्य दिनों की तरह खरीदारों की संख्या में काफी कमी थी। इसी तरह पुरानी दिल्ली स्थित चांदनी चौक, खारी-बावली, कटरा में भी दुकानें खुली रही। देर शाम के बाद ही बाजार में कुछ रौनक देखने को मिली। भागीरथ मार्केट के संजीव कुमार जिंदल ने बताया कि बंद की वजह से बाहर से व्यापारी तो नहीं आए, जिसके वजह से व्यापार पर असर पड़ा। पुरानी दिल्ली की दुकानें सभी खुली रही। सदर बाजार के व्यापारी व भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के मनोहर लाल ने बताया कि बंद का कोई असर दिल्ली के व्यापार पर नहीं रहा। दिल्ली बंद पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुआ। व्यापार अन्य दिनों की तरह ही चलता रहा। किराना बाजार के विजय कुमार बंटी ने कहा कि बंद का असर नहीं रहा।

पेट्रोल पंप पर भी नहीं दिखा असर
भारत बंद का असर दिल्ली के पेट्रोल पंप पर भी देखने को नहीं मिला। पूरी दिल्ली में करीब 400 पेट्रोल पंप है, इनमें एक भी बंद नहीं रही। दिल्ली पेट्रोल डीलर एसोसिएसशन के उ प ाध्यक्ष निशित गोयल ने बताया कि बंद का असर पेट्रोल पंप पर नहीं रहा। सभी पेट्रोल पंप खुली रही। हालांकि अन्य दिनों के मुकाबले वाहनों की संख्या सड़क पर कम कम होने की वजह से खरीद-बिक्री पर असर जरूर देखने को मिला। 

राजनीति भी कम नहीं
भारत बंद को लेकर राजनीति भी कम नहीं हुई। गुटों में बंटे व्यापारी लगातार दावा करते रहे कि दिल्ली में बंद का कोई असर नहीं दिखा। एक गुट अगर मंडियों में सन्नाटे वाली फोटो को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित करता रहा तो वहीं दूसरा गुट यह बताता रहा है कि मंडियों में दोपहर बाद कोई भीड़ नहीं होती। सुबह के वक्त ही आढ़ती अपने-अपने माल की बिक्री कर लेते है। आधी रात के बाद ही मंडी में लोग पहुंचने लगते है।

उधर, दिल्ली के व्यापारियों में भी जमकर बंटे हुए सुर सुनने को मिले। किसानों के प्रति सहानुभूति तो दिखा रहे थे, लेकिन बंद के नाम पर सीधे कहते दिखें कि इस बंद का असर बिलकुल नहीं रहा। खरीदार भले ही कम पहुंचे, लेकिन दुकानें सभी खुली रही।

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