यहां मात खाए मिर्जापुर के 'कालीन भैया': सात दिनों से न हुई बोहनी, बोले- इधर जगह नहीं मिली ठीक, हर जगह रहा सफल
कारीगर मुनद्दर का कहना है कि पहली बार सूरजकुंड मेले में स्टॉल लगाने आए हैं। उन्हें जिस जगह पर दुकान दी गई है, वहां लोगों की आवाजाही बेहद कम है। कई बार वह अपनी जगह बदलने के लिए अर्जी दे चुके हैं।
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ओटीटी प्लेटफार्म पर बेहद चर्चा में रही वेब सीरीज मिर्जापुर के कालीन भैया अपने नाम को लेकर बेशक दबंग रहे हो, लेकिन सूरजकुंड मेले में मिर्जापुर की कालीन को खास महत्व नहीं मिल रहा है। मेला शुरू होने के सात दिन बाद तक मिर्जापुर से आए मुनद्दर अली एक भी कालीन नहीं बेच पाए हैं।
मुनद्दर का कहना है कि पहली बार सूरजकुंड मेले में स्टॉल लगाने आए हैं। उन्हें जिस जगह पर दुकान दी गई है, वहां लोगों की आवाजाही बेहद कम है। कई बार वह अपनी जगह बदलने के लिए अर्जी दे चुके हैं, लेकिन फायदा नहीं हो रहा है।
मिर्जापुर से आए मुनद्दर अली के साथ मोस्जाम अली, शाहबाज आलम व नसीम अहमद भी आए हैं। उनके पास पचास रुपये से लेकर 60 हजार तक कीमत की कालीन हैं। जिसमें सिल्क, ऊन और कपास का इस्तेमाल किया जाता है। साइज की बात करें तो दो फीट बाई चार फीट से लेकर नौ बाई 12 फीट तक कालीन उपलब्ध हैं।
कुरुक्षेत्र के गीता महोत्सव, हिमाचल व कुल्लू के दशहरे में भी वह स्टॉल लगाते हैं। हर जगह उनका माल पूरा बिक जाता है, लेकिन सूरजकुंड में वे एक भी कालीन नहीं बेच पाए हैं। उन्हें जोन चार में दुकान दी गई है यदि इसकी जगह बदल दी जाए तो सामान बिक सकता है। वह एक गाड़ी सामान भरकर लाए हैं।