दिल्ली विधानसभा चुनावः वोटिंग में अल्पसंख्यक अव्वल, पूर्वांचली-पंजाबी पिछड़े
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दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों पर मतदाताओं का अलग ही अंदाज देखने को मिला। दिल्ली में सबसे ज्यादा आबादी वाले पूर्वांचली और पंजाबी बहुल इलाकों में लगभग 60 फीसदी मतदान हुआ जबकि अल्पसंख्यक मतदाताओं ने रिकॉर्ड तोड़ 70 फीसदी वोट डाले।
पॉश इलाकों में मतदान अन्य सीटों की तुलना में कम रहा। दिल्ली की प्रमुख कारोबारी सीट पर भी मतदान 60 फीसदी से ऊपर देखने को मिला। हालांकि इन मतदाताओं का रुझान किस प्रत्याशी और पार्टी की ओर गया, यह आगामी 11 फरवरी को परिणाम आने के बाद तय होगा लेकिन रविवार देर रात विधानसभा स्तर पर मतदान के आंकड़े आने के बाद नेता हार-जीत का गणित लगाने में जुट गए।
दरअसल दिल्ली की 27 सीटों पर पूर्वांचली वोटर अहम भूमिका निभाते हैं। इन सीटों पर जीत के लिए इस बार कई नए गठबंधन भी देखने को मिले। भाजपा ने जदयू और लोजपा के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरी तो कांग्रेस ने राजद के साथ गंठबंधन किया।
दिल्ली के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो शुरुआती तीन विधानसभा चुनाव में पंजाबी और वैश्य मतदाताओं की भूमिका अहम थी लेकिन समय के साथ साथ दिल्ली में जातीय समीकरणों ने करवट ली और प्रवासी (खासतौर पर पूर्वांचली) मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ती चली गई।
2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने 70 में से 12 सीटों पर पूर्वांचली प्रत्याशी उतारे थे। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी एक बड़े पूर्वांचली चेहरे हैं। भाजपा ने इस बार चुनाव में पूर्वांचल के आठ प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है।
27 पूर्वांचली सीटों पर मतदान प्रतिशत
बुराड़ी (61.12),बादली (63.51), किराड़ी (63.30), नांगलोई जाट (56.70), मादीपुर (65.59), मटियाला (61.13), विकासपुरी (59.27), उत्तम नगर (63.94), द्वारका (61.97), नजफगढ़ (64.41), देवली (63.43), अंबेडकर नगर (64.03), संगम विहार (62.16), तुगलकाबाद (60.77), त्रिलोकपुरी (66.48), कोंडली (67.01), पटपडग़ंज (61.28), लक्ष्मी नगर (61.48), विश्वास नगर (62.23), कृष्णा नगर (67.31), शाहदरा (65.80),सीमापुरी (68.09), रोहतास नगर (67.47), सीलमपुर (71.72), घोंडा (63.63), मुस्तफाबाद (70.55), करावल नगर (67.36)।
तीन बड़ी कारोबारी सीट पर मतदान
दिल्ली के चुनाव में अक्सर कारोबारी सीट शुरुआत से ही निशाने पर रहती हैं। चुनाव आयोग भी मतदान से 48 घंटे पहले इन इलाकों में अपनी चौकसी बढ़ा देता है। इसके पीछे वजह कारोबारी सीट पर चुनाव में ज्यादा नकदी का इस्तेमाल होने की आशंका भी है। इस बार भी चुनाव आयोग ने इन इलाकों में गुप्तचर उतारे थे। भाजपा, आप और कांग्रेस तीनों ही पार्टियों के लिए इन सीटों के अलग ही मायने हैं। इस बार तीन में से एक कारोबारी सीट चांदनी चौक में सबसे दिलचस्प मुकाबला भी देखने को मिल रहा है। कारोबारी सीट वजीरपुर (60.30), चांदनी चौक (61.03) और सदर बाजार में 66.70 फीसदी मतदान हुआ।
छह पंजाबी-सिख बहुल सीटों पर मतदान
दिल्ली की सियासत में पंजाबी और सिख बहुल मतदाताओं में पैठ बनाना लगभग हर सियासी दल की कोशिश रहती है। भाजपा हमेशा से अकाली दल के साथ मिलकर इन मतदाताओं के बीच दिखाई दी है। जबकि इस बार चुनाव से अकाली दल ने दूरी जरूर बनाई हुई थी लेकिन कई जनसभाओं में इनके नेता साथ साथ नजर आए थे। दिल्ली में पंजाबी और सिख बहुल सीटों में हरी नगर (61.51), तिलक नगर (63.76), जनकपुरी (65.57), राजौरी गार्डन (61.80), मोती नगर (61.81) और जंगपुरा में 60.52 फीसदी मतदान हुआ।
आठ पॉश सीटों पर मतदान
दिल्ली के लगभग सभी चुनाव में पॉश कॉलोनियों को लेकर नेताओं में अलग ही रुझान देखने को मिलता है। सियासी दलों के अनुसार पॉश कॉलोनियों में प्रचार के लिए मुद्दे भी बाकी क्षेत्रों से अलग होते हैं। इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने पॉश कॉलोनियों में जनसभाओं के दौरान विकास के मुद्दे को उठाया था। रोहिणी (63.02), शालीमार बाग (61.62), मॉडल टाउन (59.35), दिल्ली कैंट (45.35), राजेंद्र नगर (58.27), मालवीय नगर (58.71), नई दिल्ली (52.15) और ग्रेटर कैलाश पॉश सीट पर 59.94 फीसदी ही मतदान हुआ।
दिल्ली की ग्रामीण सीटों पर खूब मतदान
बाहरी दिल्ली की ग्रामीण सीटों पर मतदाताओं ने काफी संख्या में पोलिंग बूथ आकर ईवीएम का बटन दबाया। बाहरी दिल्ली की नरेला (64.98), बादली (63.51), बवाना (61.60), मुंडका (59.24), नजफगढ़ (64.41) और बिजवासन सीट में 61.82 फीसदी मतदान हुआ।
अल्पसंख्यकों ने 70 का आंकड़ा किया पार
अल्पसंख्यक मतदाताओं की बात करें तो दिल्ली में इनकी आबादी करीब 20 फीसदी के आसपास बताई जाती है। राजनैतिक पार्टियों के ही अनुसार दिल्ली के सीलमपुर, मुस्तफाबाद, ओखला, मटिया महल और बल्लीमारान मुस्लिम बहुल सीटें हैं। बीते शनिवार को देर रात तक इन सीटों पर मतदान जारी होने के कारण अगले दिन स्थिति कुछ और ही नजर आई। दिल्ली में सबसे ज्यादा मतदान बल्लीमारान सीट पर हुआ है। यहां 71.60 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसके अलावा मुस्तफाबाद में 70.55, सीलमपुर में 71.22, सीमापुरी में 68.99, गांधी नगर में 62.42, शाहदरा में 65.80 फीसदी मतदान हुआ। इनके अलावा सबसे कम मुस्लिम बहुल सीट ओखला में 58.84 फीसदी मतदान हुआ। शाहीन बाग इसी विधानसभा क्षेत्र में आता है जहां कई दिनों से सीएए और एनआरसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा है। इतना ही नहीं मटिया महल में 70.38 फीसदी मतदान हुआ है।