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माइक्रो कंटेनमेंट जोन ने भी लगाई बढ़ते संक्रमण पर रोक
Sat, 18 Jul 2020 04:13 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Sat, 18 Jul 2020 04:13 PM IST
सार
- -राजधानी में इस समय सक्रिय मरीज कम होने में इस रणनीति की भी अहम भूमिका
- -छोटे इलाके होने के कारण सख्ती से हो रही निगरानी, पहले नहीं रुक रहा था लोगों का आवागमन
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corona in india
- फोटो : PTI
विस्तार
राजधानी में मई और जून के दौरान कोरोना संक्रमितों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी थी। इसका एक बड़ा कारण यह भी था कि कंटेनमेंट जोन घोषित किए गए इलाकों में भी लगातार नए मरीज मिल रहे थे। बढ़ते मामले सरकार के लिए एक चिंता का विषय थे। इसको देखते हुए प्रशासन ने माइक्रो कंटेनमेंट जोन की रणनीति बनाई, जिससे इन इलाकों में बढ़ते संक्रमण पर अब काबू पाया जा रहा है।
दिल्ली में संक्रमितों की संख्या लगातार कम होने में यह रणनीति अहम भूमिका निभा रही है।
पहले जब भी किसी इलाके को रेड जोन घोषित किया जाता था तो पूरे क्षेत्र को सील कर गली के बाहर बैरिकेडिंग की जाती थी। इलाका बड़ा होने के कारण निगरानी करने में भी परेशानी होती थी। कंटेनमेंट जोन में भी लोग एक-दूसरे के घर आना-जाना कर रहे थे, जिससे लगातार संक्रमण फैल रहा था। बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से एक समिति गठित की गई थी, जिसके सदस्यों ने सभी जिलाधिकारियों को सुझाव दिया कि कंटेनमेंट जोन में बढ़ते संक्रमण पर रोक लगाने के लिए इन इलाकों में निगरानी और रेड जोन की संख्या बढ़ानी होगी।
सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि इस विषय पर जिला उपायुक्त और सभी जिलाधिकारियों की एक बैठक हुई, जिसमें माइक्रो कंटेनमेंट जोन की रणनीति पर काम करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत पूरी गली या इलाके की जगह जहां संक्रमण का मामला आता है। उसके आसपास के चार से पांच घरों को ही सील किया जाता है। इससे सील किए गए इलाके की निगरानी आसानी से होती है। साथ ही इन क्षेत्रों में रह रहे लोगों को 14 दिन के आइसोलेशन के समय में बाहर आने-जाने नहीं दिया जाता है। प्रशासन द्वारा सभी जरूरी सुविधाएं उनके घर में ही उपलब्ध कराई जाती है। इससे बढ़ते संक्रमण को रोकने में काफी सहायता मिली है। दिल्ली में कोरोना के कम मामले होने में माइक्रो कंटेनमेंट जोन की भी अहम भूमिका है।
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मामले कम होने पर भी बढ़ रही कंटेनमेंट जोन की संख्या
माइक्रो कंटेनमेंट जोन के तहत अब जिस घर में भी संक्रमण का मामला आता है, उसके आसपास के घरों को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया जाता है। करीब 20 दिन में ही 255 नए कंटेनमेंट जोन बढ़ गए हैं। इसलिए ही संक्रमण के मामले कम होने पर भी रेड जोन की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस समय राजधानी में 645 कंटेनमेंट जोन हैं।
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दिल्ली में संक्रमितों की संख्या लगातार कम होने में यह रणनीति अहम भूमिका निभा रही है।
पहले जब भी किसी इलाके को रेड जोन घोषित किया जाता था तो पूरे क्षेत्र को सील कर गली के बाहर बैरिकेडिंग की जाती थी। इलाका बड़ा होने के कारण निगरानी करने में भी परेशानी होती थी। कंटेनमेंट जोन में भी लोग एक-दूसरे के घर आना-जाना कर रहे थे, जिससे लगातार संक्रमण फैल रहा था। बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से एक समिति गठित की गई थी, जिसके सदस्यों ने सभी जिलाधिकारियों को सुझाव दिया कि कंटेनमेंट जोन में बढ़ते संक्रमण पर रोक लगाने के लिए इन इलाकों में निगरानी और रेड जोन की संख्या बढ़ानी होगी।
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सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि इस विषय पर जिला उपायुक्त और सभी जिलाधिकारियों की एक बैठक हुई, जिसमें माइक्रो कंटेनमेंट जोन की रणनीति पर काम करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत पूरी गली या इलाके की जगह जहां संक्रमण का मामला आता है। उसके आसपास के चार से पांच घरों को ही सील किया जाता है। इससे सील किए गए इलाके की निगरानी आसानी से होती है। साथ ही इन क्षेत्रों में रह रहे लोगों को 14 दिन के आइसोलेशन के समय में बाहर आने-जाने नहीं दिया जाता है। प्रशासन द्वारा सभी जरूरी सुविधाएं उनके घर में ही उपलब्ध कराई जाती है। इससे बढ़ते संक्रमण को रोकने में काफी सहायता मिली है। दिल्ली में कोरोना के कम मामले होने में माइक्रो कंटेनमेंट जोन की भी अहम भूमिका है।
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मामले कम होने पर भी बढ़ रही कंटेनमेंट जोन की संख्या
माइक्रो कंटेनमेंट जोन के तहत अब जिस घर में भी संक्रमण का मामला आता है, उसके आसपास के घरों को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया जाता है। करीब 20 दिन में ही 255 नए कंटेनमेंट जोन बढ़ गए हैं। इसलिए ही संक्रमण के मामले कम होने पर भी रेड जोन की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस समय राजधानी में 645 कंटेनमेंट जोन हैं।