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'पानी पर मचा है हाहाकार और मेट्रो को चमकाने के लिए हो रहा भू-जल का इस्तेमाल'

Wed, 25 May 2016 01:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 25 May 2016 01:24 AM IST
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'Metro groundwater used for polishing up'
मेट्रो - फोटो : अमर उजाला

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) से भू-जल का इस्तेमाल ट्रेनों की साफ-सफाई करने के मामले में स्पष्ट जवाब देने को कहा है। डीएमआरसी के मुताबिक उन्हें भू-जल का इस्तेमाल करने की अनुमति है।

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इस पर बेंच ने कहा कि वे अनुमति संबंधी रिकॉर्ड ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश करें। जस्टिस यूडी साल्वी की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली निवासी कुश कालरा की याचिका पर यह निर्देश दिया है। बेंच ने हाल ही में संबंधित मामले में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) से भी इस मामले पर जवाब मांगा था। 
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बेंच ने मांगा स्पष्ट जवाब 
बेंच ने कहा कि डीएमआरसी भू-जल दोहन की छूट संबंधी अनुमति को लेकर अपना स्पष्ट पक्ष ट्रिब्यूनल में रखे। बेंच ने कहा कि कुछ अवधि के लिए उन्हें छूट दी गई थी या भू-जल दोहन की छूट उन्हें हमेशा के लिए है।
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याची का आरोप है कि डीएमआरसी मेट्रो ट्रेनों की सफाई के लिए वेस्ट वाटर की जगह भू-जल का दोहन और इस्तेमाल कर रही है। इसकी वजह से संबंधित इलाकों में भू-जल का स्तर तेजी से गिर रहा है। 

'एक मेट्रो ट्रेन की सफाई में 500 लीटर पानी बर्बाद'

'Metro groundwater used for polishing up'
एनजीटी

दिल्ली मेट्रो महज ट्रेनों को चमकाने के लिए भू-जल का इस्तेमाल कर रही जबकि देश में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। आरटीआई के जवाब को बनाया आधार याची ने एनजीटी से मांग की है कि वह डीएमआरसी को बिना अनुमति भू-जल दोहन और गलत इस्तेमाल के लिए के लिए दंडित करें।

याची ने अपने आरोपों के लिए सूचना के अधिकार के तहत मिले जवाब को आधार बनाया है। आरटीआई के तहत मिले जवाब में कहा गया है कि डीएमआरसी भू-जल दोहन के लिए बोरवेल का इस्तेमाल कर रही है।
 
याची का आरोप है कि एक मेट्रो ट्रेन की सफाई के लिए 400 से 500 लीटर भू-जल का दोहन किया जा रहा है। इस्तेमाल किए गए पानी को बाद इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी - शोधन यंत्र) में भेजा जाता है। 

इसके बाद इस शोधित पानी का इस्तेमाल बाग-बगीचों के लिए किया जाता है। वहीं दिल्ली जल बोर्ड के जरिए आरटीआई से मिले जवाब के तहत भू-जल के लिए डीएमआरसी को किसी तरह की अनुमति नहीं दी गई है। हालांकि एक दूसरे जवाब में प्राधिकरण ने उन मेट्रो स्टेशनों की लिस्ट मुहैया कराई है जिसमें निर्माण के लिए भू-जल दोहन की अनुमति दी गई है। 

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