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Delhi NCR News: जंतर-मंतर से युवाओं का संदेश-शिक्षा व्यवस्था में चाहिए जवाबदेही
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प्रदर्शनकारियों ने कहा- आंदोलन किसी व्यक्ति नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही के लिए था
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। देशभर से आए युवाओं ने जंतर-मंतर पर जुटकर साफ संदेश दिया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध में नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के लिए है। वर्षों की मेहनत, लाखों रुपये की कोचिंग फीस और बेहतर भविष्य के सपनों के बीच पेपर लीक जैसी घटनाओं ने छात्रों का भरोसा गहरा आहत किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब समय आ गया है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े फैसलों की जिम्मेदारी तय हो और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
उत्तराखंड से आए छात्र प्रियांशु रावत ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक सकारात्मक कदम है, लेकिन आंदोलन का उद्देश्य केवल एक व्यक्ति का इस्तीफा नहीं था। यह संघर्ष व्यवस्था को जवाबदेह बनाने और यह संदेश देने के लिए था। उन्होंने कहा, बड़े पदों पर बैठे लोगों को अपनी जिम्मेदारियां स्वीकार करनी होंगी।
परीक्षा में गड़बड़ी से भरोसा होता है कमजोर
क्लीनिकल साइकोलॉजी की छात्रा विशाखा ने कहा कि 2024 के नीट पेपर लीक ने लाखों छात्रों की मेहनत पर सवाल खड़े कर दिए। वर्षों की तैयारी और भारी-भरकम कोचिंग फीस के बाद यदि परीक्षा की निष्पक्षता पर ही संदेह हो जाए तो छात्रों का आत्मविश्वास टूट जाता है। दिल्ली के रोहित कुमार ने कहा कि लंबे समय से युवा शिक्षा व्यवस्था की खामियों से परेशान थे और जंतर-मंतर पर उन्होंने अपनी नाराजगी खुलकर जताई। उनके अनुसार इस्तीफे से छात्रों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन भविष्य में भी शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर युवाओं को सजग रहना होगा।
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सुधार की उम्मीद के साथ लौटे छात्र
मध्य प्रदेश से आए छात्र बहादुर ने कहा कि हाल की घटनाएं बेहद निराशाजनक थीं, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि अब सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाएगी। आंदोलन समाप्त होने की घोषणा के बाद प्रदर्शनकारी धीरे-धीरे जंतर-मंतर से लौट गए। उनके चेहरों पर संतोष के साथ यह उम्मीद भी थी कि आने वाले समय में छात्रों को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था मिलेगी।
अभिजीत दिपके का भावुक पल बना चर्चा का विषय
आंदोलन समाप्त होने के ऐलान के बीच सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही जंतर-मंतर पर आयोजित सभा में वह भावुक हो गए। वीडियो में वह घुटनों के बल बैठकर मंच पर हाथ मारते हुए अपनी खुशी जाहिर करते दिखाई दिए। यह दृश्य समर्थकों के लिए लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता और व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद का प्रतीक बन गया।
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नितिन राजपूत
नई दिल्ली। देशभर से आए युवाओं ने जंतर-मंतर पर जुटकर साफ संदेश दिया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध में नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के लिए है। वर्षों की मेहनत, लाखों रुपये की कोचिंग फीस और बेहतर भविष्य के सपनों के बीच पेपर लीक जैसी घटनाओं ने छात्रों का भरोसा गहरा आहत किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब समय आ गया है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े फैसलों की जिम्मेदारी तय हो और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
उत्तराखंड से आए छात्र प्रियांशु रावत ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक सकारात्मक कदम है, लेकिन आंदोलन का उद्देश्य केवल एक व्यक्ति का इस्तीफा नहीं था। यह संघर्ष व्यवस्था को जवाबदेह बनाने और यह संदेश देने के लिए था। उन्होंने कहा, बड़े पदों पर बैठे लोगों को अपनी जिम्मेदारियां स्वीकार करनी होंगी।
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परीक्षा में गड़बड़ी से भरोसा होता है कमजोर
क्लीनिकल साइकोलॉजी की छात्रा विशाखा ने कहा कि 2024 के नीट पेपर लीक ने लाखों छात्रों की मेहनत पर सवाल खड़े कर दिए। वर्षों की तैयारी और भारी-भरकम कोचिंग फीस के बाद यदि परीक्षा की निष्पक्षता पर ही संदेह हो जाए तो छात्रों का आत्मविश्वास टूट जाता है। दिल्ली के रोहित कुमार ने कहा कि लंबे समय से युवा शिक्षा व्यवस्था की खामियों से परेशान थे और जंतर-मंतर पर उन्होंने अपनी नाराजगी खुलकर जताई। उनके अनुसार इस्तीफे से छात्रों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन भविष्य में भी शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर युवाओं को सजग रहना होगा।
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सुधार की उम्मीद के साथ लौटे छात्र
मध्य प्रदेश से आए छात्र बहादुर ने कहा कि हाल की घटनाएं बेहद निराशाजनक थीं, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि अब सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाएगी। आंदोलन समाप्त होने की घोषणा के बाद प्रदर्शनकारी धीरे-धीरे जंतर-मंतर से लौट गए। उनके चेहरों पर संतोष के साथ यह उम्मीद भी थी कि आने वाले समय में छात्रों को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था मिलेगी।
अभिजीत दिपके का भावुक पल बना चर्चा का विषय
आंदोलन समाप्त होने के ऐलान के बीच सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही जंतर-मंतर पर आयोजित सभा में वह भावुक हो गए। वीडियो में वह घुटनों के बल बैठकर मंच पर हाथ मारते हुए अपनी खुशी जाहिर करते दिखाई दिए। यह दृश्य समर्थकों के लिए लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता और व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद का प्रतीक बन गया।