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Delhi NCR News: खामोशी में सिमटी माहवारी, अनकही पीड़ा से जूझ रहीं किशोरियां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 28 Mar 2026 09:52 PM IST
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शहर में सिर्फ 20 प्रतिशत अभिभावक ही करते हैं बेटियों से खुलकर बात
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शुरू के दो वर्षों में माहवारी की अनियमितता सामान्य, पर समय पर इलाज जरूरी

संवाद न्यूज एजेंसी

नोएडा। समय बदल तो रहा है, लेकिन कई मसलों पर समाज की सोच अभी भी पीछे है। किशोरियों की माहवारी जैसे संवेदनशील विषय पर आज भी घरों में खामोशी रहती है। शारीरिक बदलाव से गुजर रहीं 10-11 साल की अधिकतर बच्चियां इस विषय पर माता-पिता से खुलकर बात नहीं कर पातीं। जिला अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ 20 प्रतिशत अभिभावक ही इस विषय पर बेटियों से संवाद करते हैं, जिससे डर, संकोच और गलत धारणाएं बढ़ती रहतीं हैं।

जिला अस्पताल माहवारी से जुड़ी समस्या लेकर आने वाली किशोरियां डॉक्टरों को भी खुलकर अपनी परेशानी नहीं बता पातीं। डॉ. रुचि के मुताबिक कई बार किशोरियाें को गंभीर समस्याएं होती हैं, लेकिन वे बताने से कतरातीं हैं। ऐसे में अभिभावकों को समझदारी दिखाने की जरूरत है।
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बात करने में आती है शर्म

सेक्टर-48 की 15 वर्षीय नेहा ने अस्पताल में बताया कि उन्हें इस संबंध में माता-पिता से बात करने में शर्म आती है। माहवारी में काफी दर्द होता है। कई बार कोशिश की, लेकिन बता नहीं पाई। वहीं, सेक्टर-22 की संगीता कहती हैं कि उन्होंने पहली बार मां को बताया था, लेकिन उसके बाद इस विषय पर कभी चर्चा नहीं हुई।
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सीएमएस डॉ. अजय राणा बताते हैं कि पीसीओडी या पीसीओएस जैसी समस्याओं से जूझ रहीं बच्चियां भी अपनी बात नहीं रख पातीं। कई को असहनीय दर्द होता है तो कई अनियमित माहवारी से जूझती हैं, लेकिन शर्म और झिझक से वे चुप रहती हैं।




समय पर इलाज नहीं मिलने से स्थिति हो सकती है गंभीर



भंगेल सीएचसी में तैनात गाइनाकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा के अनुसार, अभिभावक से बात नहीं कर पाने पर किशोरियां इंटरनेट या सहेलियों से जानकारी लेने लगतीं हैं, जो अक्सर गलत होती हैं। उन्होंने बताया कि माहवारी के शुरू के दो वर्षों में अनियमितता सामान्य हो सकती है, लेकिन सही जानकारी और समय पर इलाज नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो सकती है।



अभिभावकों के लिए जरूरी सलाह



-माहवारी पर खुलकर और सामान्य तरीके से बात करें

-बच्चियों के सवालों का सही और सरल जवाब दें
-बेटियों को सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल दें

-स्कूल से पहले घर पर ही बेसिक जानकारी दें

-दर्द, अनियमितता या कमजोरी को नजरअंदाज न करें

-डॉक्टर से समय-समय पर सलाह लें
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