Delhi: भारतीय डॉक्टरों की धूम, मेडिकल टूरिज्म में बूम, फॉलोअप के मरीजों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी
भारत में कैंसर, स्पाइन, हृदय रोग, न्यूरो सर्जरी, लिवर व किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा विकसित देशों के मुकाबले तीन से चार गुना तक सस्ती मिल रही है। इसके अलावा इलाज के परिणाम बेहतर साबित हो रहे हैं।
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विकसित देशों की तुलना में देश में मिल रही सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं खाड़ी और अफ्रीकी देश के मरीजों के लिए पहली पसंद बन रही हैँ। इन देशों के मरीज उपचार के लिए अमेरिका, लंदन और हांगकांग की जगह भारत आना चाहते हैं।
भारत में कैंसर, स्पाइन, हृदय रोग, न्यूरो सर्जरी, लिवर व किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा विकसित देशों के मुकाबले तीन से चार गुना तक सस्ती मिल रही है। इसके अलावा इलाज के परिणाम बेहतर साबित हो रहे हैं। कोरोना महामारी के बाद देश में स्वास्थ्य सुविधाओं का आधुनिकीकरण व विस्तार हुआ है। सर्जरी व पुनर्वास के लिए रोबोटिक व कृत्रिम बुद्धिमता युक्त उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। पेश है अमर उजाला संवाददाता राकेश शर्मा की रिपोर्ट।
देश में मेडिकल टूरिज्म तीन साल में डेढ़ गुना होने की उम्मीद
- एक्सपो में आए विशेषज्ञ ने बताया कि अनुमान जताया जा रहा है कि अगले तीन से चार साल में मेडिकल टूरिज्म से होने वाली आय डेढ़ गुना तक बढ़ने की उम्मीद है। वर्तमान में मिले आंकड़ों के अनुसार देश में मेडिकल टूरिज्म 2020 के मध्य में करीब 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जो 2026 तक 13 बिलियन होने का अनुमान लगाया जा रहा है। देश में बड़ी संख्या में लोग अंग प्रत्यारोपण, कैंसर और आईवीएफ के लिए देश में आते हैं।
- मणिपाल अस्पताल में इंटरनेशनल हेल्थ केयर सर्विस के प्रमुख विकास तैयर ने बताया कि प्री कोविड के मुकाबले विदेश से उपचार करवाने आए मरीजों में 15% तक का उछाल है।
- पिछले साल देश के मणिपाल अस्पताल में विदेश से 24 से 25 हजार मरीज उपचार करवाने आए थे। इन मरीजों ने अस्पताल में कैंसर, स्पाइन केयर, लीवर व किडनी प्रत्यारोपण, यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, बोन मेरो ट्रांसप्लांट, न्यूरो सर्जरी की सुविधा ली।
- कोरोना महामारी के बाद जब फिर से सुविधाएं बहाल हुई थीं, उस समय अचानक मरीजों की संख्या काफी बढ़ी, लेकिन अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है, लेकिन कोरोना के पहले के मुकाबले अभी भी 15% का उछाल देखा जा रहा है।
फॉलोअप के मरीजों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी
ऑनलाइन सेवाओं से सुविधाओं को सरल बनाया गया है, जिससे फॉलोअप के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है, जो अपने देश जाने के बाद फिर से आने से हिचकते थे। यही कारण है कि भारत में तेजी से मेडिकल टूरिज्म बढ़ रहा है। इसकी एक झलक प्रगति मैदान में आयोजित हुए भारत के सबसे बड़े हेल्थ एक्सपो में भी देखने को मिली। इस एक्सपो में बड़ी संख्या में देश के निजी अस्पतालों की चेन ने हिस्सा लिया। इन अस्पतालों के पास बड़ी संख्या में खाड़ी व अफ्रीकी देशों से प्रतिनिधि मिलने आए।
अमेरिका के अस्पतालों में एक से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं लिवर प्रत्यारोपण में
अमृता अस्पताल के स्टॉल पर इराक से आए अब्दुल जब्बार ने बताया कि भारत में वह परिजन के लिवर प्रत्यारोपण के लिए लाए हैं। एक्सपो में उन्होंने अपोलाे, मैक्स, अमृता, कैलाश सहित अन्य अस्पतालों के स्टॉल पर चर्चा की। चर्चा के दौरान यह सुविधा 25 से 35 लाख तक मिलने का अनुमान बताया गया, जबकि अमेरिका के अस्पताल ने ईमेल के माध्यम से इसी प्रत्यारोपण के लिए एक से डेढ़ करोड़ रुपये का खर्च बताया था। उन्होंने बताया कि भारत में अमेरिका के मुकाबले रहना और अन्य खर्च भी काफी कम है। साथ ही जो सुविधा अमेरिका जैसे विकसित देशों में मिल रही हैं, उससे बेहतर सुविधाएं भारत में देने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में विकसित देशों की तुलना में भारत ही बेहतर विकल्प है।