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'परिवारिक रंजिश व पुश्तैनी दुश्मनी के चलते लगाया गया मकोका'

Sun, 25 Oct 2015 01:40 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 25 Oct 2015 01:40 AM IST
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MCOCA imposed  because of family rivalry and feud.

गाजीपुर के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी ने स्पेशल सेल के पूर्व एसीपी व वर्तमान डीसीपी पर पुश्तैनी दुश्मनी के चलते अवैध तरीके से मकोका का झूठा मुकदमा दर्ज करने का आरोप लगाया है।

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अंसारी का कहना है कि पुलिस अधिकारी के पिता व उनके परिवार के बीच पुरानी दुश्मनी है, जिसके चलते उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करवाया गया। यह आरोप अंसारी ने पूर्व एसीपी पर कोर्ट में अपने बयान में लगाया।
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तीस हजारी अदालत में मुख्तार अंसारी ने आवेदन दायर कर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के पूर्व एसीपी व वर्तमान डीसीपी संजीव यादव को दोबारा जिरह के लिए बुलाने की मांग की है।
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डीसीपी पर लगाए गंभीर आरोप

MCOCA imposed  because of family rivalry and feud.

अंसारी का कहना है कि तत्कालीन एसीपी संजीव यादव की अर्जी पर ही स्पेशल सेल के तत्कालीन संयुक्त आयुक्त पीएन अग्रवाल ने सात नवंबर 2009 को मकोका के तहत मुकदमा दर्ज करने की अनुमति दी थी।

इसके बाद संजीव यादव के रुक्का (सूचना) पर मकोका के तहत एफआईआर संख्या 66/2009 दर्ज किया गया था। इस मुकदमे के पीछे संजीव यादव की दुर्भावना थी।

विधायक मुख्तार अंसारी ने 29 सितंबर 2015 को कोर्ट में गवाही देते हुए कहा कि गाजीपुर, बलिया व मऊ पड़ोसी जिले हैं। वह गाजीपुर व डीसीपी संजीव यादव बलिया जिले के रहने वाले हैं।

डीसीपी यादव के पिता यूपी पुलिस में मोहम्मदाबाद थाने में एसआई थे और बाद में मोहम्मदाबाद के डीएसपी भी रहे। अंसारी ने अपने बयान में कहा कि पुलिस की नौकरी से रिटायर होकर 1993 में यादव के पिता भी राजनीति में आ गए।

28 अक्टूबर को अर्जी पर फैसला

MCOCA imposed  because of family rivalry and feud.

इस बीच डीसीपी के पिता व उनके परिवार के बीच काफी खींचतान रही। दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी काफी पुरानी है। पेश मामले में जांच अधिकारी रहे संजीव यादव का बयान अभियोजन ने 23 मार्च 2015 को दर्ज करवाया था।

बचाव के अधिवक्ता दीपक शर्मा ने पुलिस के केस को झूठा बताया था लेकिन यादव ने इस दलील को नकार दिया था। अदालत में नौ अक्तूबर को दायर आवेदन में मुख्तार अंसारी ने कहा है कि दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी के पहलू की जानकारी कोर्ट को नहीं है क्योंकि यह तथ्य उसके बयान में पहली बार सामने आया।

इसलिए पुलिस अधिकारी से उनका वकील जिरह नहीं कर सका क्योंकि उस दिन उन्हें लखनऊ जेल से कोर्ट में पेश नहीं किया गया था और पुरानी दुश्मनी के तथ्य की जानकारी उनके वकील को नहीं थी। इसलिए इस पुलिस अधिकारी से दोबारा जिरह करने का मौका दिया जाए। अर्जी पर अदालत 28 अक्तूबर को फैसला सुनाएगी।

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