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अध्यापक को घर-घर जाकर चुनावी सर्वे के लिए नहीं कर सकते विवश, हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

Mon, 28 Jan 2019 06:13 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 28 Jan 2019 06:13 AM IST
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mcd teachers will not go house to house for poll survey says high court
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

राजधानी में आगामी चुनावों के लिए नगर निगम के स्कूलों के अध्यापक अब घर-घर जाकर सर्वे करते नजर नहीं आएंगे। हाईकोर्ट ने इस संबंध में जारी सभी आदेश रद्द कर दिए हैं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि स्कूलों के प्रधानाचार्यों व अध्यापकों से पढ़ाई के अलावा नगर निगम उनसे कोई दूसरा काम नहीं करवा सकती।  

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न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर ने आदेश जारी कर कहा कि चुनावी सर्वे का बच्चों की शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। हाईकोर्ट ने चुनावी सर्वे व वार्ड एजूकेशन रजिस्टर बनाने की तैयारी में हिस्सा लेने वाले सभी सरकारी आदेशों पर रोक लगा दी है। हालांकि, इन अध्यापकों से छात्रों के बैंक खाते खोलने और उन्हें आधार से जोड़ने में सहायता ली जा सकती है, लेकिन यह भी अनिवार्य नहीं है। इसे उनके खिलाफ कार्रवाई का आधार नहीं बनाया जा सकता।  
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हाईकोर्ट ने अखिल दिल्ली प्राथमिक शिक्षक संघ की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि शिक्षा एक गंभीर मुद्दा है और शिक्षक देश का भविष्य तैयार करते हैं। अगर उन्हें इस काम से हटाकर दूसरे कामों में लगाया जाएगा तो उनका काम प्रभावित होगा, जिससे देश का भविष्य भी प्रभावित होगा।  
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याचिका दायर कर शिक्षक संघ ने अध्यापकों को छात्रों के बैंक खाते खोलने, उन्हें आधार से जोड़ने के साथ ही घर-घर जाकर चुनावी सर्वे करने के आदेशों को चुनौती दी थी। शिक्षकों का कहना था कि आरटीई के मुताबिक, वार्ड एजूकेशन रजिस्टर तैयार करना स्थानीय निकायों का काम है, अध्यापकों का नहीं।  


याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने भी इस बात को माना कि आरटीई कानून व आरटीई नियमों के मुताबिक, चुनावी सर्वे व वार्ड एजूकेशन रजिस्टर तैयार करना शिक्षकों की नहीं, बल्कि स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है। इसमें स्थानीय निकाय अध्यापकों से सहयोग मांग सकती है लेकिन इससे इंकार करने पर किसी अध्यापक पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती।

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