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इस वेबसाइट की देखभाल पर हर महीने खर्च होते हैं एक करोड़ रुपये

Fri, 16 Oct 2015 03:02 PM IST
Updated Fri, 16 Oct 2015 03:02 PM IST
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mcd spends one crore per month to maintain website

एक आरटीआई के जवाब में दिल्ली नगर निगम ने ऐसा जवाब दिया है जिसे सुनकर आप हक्के-बक्के रह जाएंगे। एमसीडी ने इस जवाब में कहा है कि वो अपनी वेबसाइट (mcd.gov.in) को चलाने के लिए हर महीने 1 करोड़ की बड़ी रकम खर्च करती है।

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नगर निगम अपने वेबसाइट की रख-रखाव के लिए ये रकम पिछले डेढ़ साल से टेक महिंद्रा को दे रही है। जबकि दिल्ली सरकार अपनी वेबसाइट की रखरखाव पर 12 लाख रुपयों से कुछ अधिक सालाना खर्च करती है।
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दक्षिण दिल्ली नगर निगम के अनुसार ये राशि तीनों निगमों की वेबसाइट पर खर्च की गई राशि का एक तिहाई ही है। ये तीनों निगम कुल मिलाकर 1 करोड़ की राशि टेक महिंद्रा को देते हैं ताकि वो इनकी वेबसाइट अपडेट रखे।

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हाईकोर्ट ने दिया आदेश

mcd spends one crore per month to maintain website

गौरतलब है कि 2013 में टेक महिंद्रा और निगमों के बीच में वेबसाइट के रखरखाव के लिए चुकाई जा रही राशि को लेकर कुछ विवाद हो गया था। तब कई हफ्तों तक निगम की ऑनलाइन सेवाएं बाधित रही थीं।

इस विवाद को तब सुलझाया जा सका जब निगमों ने उच्च न्यायालय में अपील की। तब उच्च न्यायालय ने यह फैसला सुनाया था कि एमसीडी की वेबसाइट से बड़े रूप में जनता का हित निहित है। इसलिए एमसीडी को हर महीने टेक महिंद्रा को वेबसाइट की मेंटेनेंस के लिए 1 करोड़ रुपए देने होंगे।

विपक्षियों ने इसे एमसीडी के द्वारा पैसों का आपराधिक ढंग से दुरुपयोग बताया है। सभासद अभिशेक दत्त प्रश्न करते हैं कि आखिर एमसीडी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती क्यों नहीं दी।

किसी को नहीं पता कहां से आते हैं 1 करोड़

mcd spends one crore per month to maintain website

गौरतलब है कि टेक महिंद्रा ने एमसीडी को 25 अक्टूबर 2013 से सेवाएं प्रदान करना बंद कर दिया था। कंपनी का दावा था कि एमसीडी का कंपनी पर 116 करोड़ रुपया बकाया है जो एमसीडी ने नहीं चुकाया है।

हालांकि एमसीडी वेबसाइट पर हर महीने 1 करोड़ रुपए खर्च करती है ‌लेकिन फिर भी वेबसाइट का जो सबसे महत्वपूर्ण भाग है यानी सभासदों की परफॉर्मेंस और वार्डों का विकास उस सेक्शन को ‌‌निष्क्रिय (डीएक्टीवेट) कर दिया गया है।

द्त्त का सवाल है कि 'तब पैसा किस काम के लिए दिया जा रहा है?' बता दें‌ कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने आरटीआई में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि अभी तक निगम का ई-गवर्नेंस पर बजट 65 करोड़ है। मेयर सुभाष आर्य ने कहा कि वो इस बारे में नहीं जानते अब वो इस मामले को देखेंगे।

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