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MCD ने शपथपत्र सहित इस तथ्य को स्वीकारा, विशेष शिक्षकों के 1741 पद भर्ती मात्र 49
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 13 Dec 2016 12:10 AM IST
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दिल्ली उच्च न्यायालय
- फोटो : Google
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राजधानी के निगम स्कूलों में विशेष शिक्षकों के 1741 पद सृजित है लेकिन मात्र 49 शिक्षकों की ही भर्ती हो पाई है। शेष 1692 पद अभी भी रिक्त है। हाईकोर्ट में राजधानी में विशेष शिक्षकों की भर्ती मामले की सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है।
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने हाई कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया कि 90 विशेष शिक्षकों के नाम दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को भेज दिए गए हैं और विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रहीं है।
इसके अलावा निगम अधिकारियों ने बताया है कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम के स्कूलों में 5969 शिक्षक नियमित नियुक्ति पर काम कर रहें हैं और 703 से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। वहीं, दक्षिणी दिल्ली के निगम स्कूलों में 76 नर्सरी शिक्षक व 71 प्रधानाचार्यों के पद रिक्त हैं। वर्तमान में 510 प्रधानाचार्य काम कर रहें हैं।
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याचिकाकर्ता अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के अनुसार अदालत द्वारा शिक्षकों के पद भरने संबंधी निर्देश के बावजूद स्कूलों में शिक्षकों के करीब 26031 पद रिक्त पड़ें हैं। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों पर अदालत की अवमानना की कार्रवाई की जाए और शिक्षकों के रिक्त पद तुरंत भरे जाएं। याची का दावा है कि सरकार का हर वर्ष शिक्षकों की सैलरी के लिए तय 50 प्रतिशत बजट बेकार जा रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2017 को होगी।
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दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने हाई कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया कि 90 विशेष शिक्षकों के नाम दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को भेज दिए गए हैं और विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रहीं है।
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इसके अलावा निगम अधिकारियों ने बताया है कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम के स्कूलों में 5969 शिक्षक नियमित नियुक्ति पर काम कर रहें हैं और 703 से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। वहीं, दक्षिणी दिल्ली के निगम स्कूलों में 76 नर्सरी शिक्षक व 71 प्रधानाचार्यों के पद रिक्त हैं। वर्तमान में 510 प्रधानाचार्य काम कर रहें हैं।
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याचिकाकर्ता अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के अनुसार अदालत द्वारा शिक्षकों के पद भरने संबंधी निर्देश के बावजूद स्कूलों में शिक्षकों के करीब 26031 पद रिक्त पड़ें हैं। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों पर अदालत की अवमानना की कार्रवाई की जाए और शिक्षकों के रिक्त पद तुरंत भरे जाएं। याची का दावा है कि सरकार का हर वर्ष शिक्षकों की सैलरी के लिए तय 50 प्रतिशत बजट बेकार जा रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2017 को होगी।