Delhi MCD Election: सफाई और भ्रष्टाचार दिल्ली वालों के लिए निगम चुनाव में प्रमुख चुनावी मुद्दा
MCD Election: पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मीनगर के निवासी धर्मेंद्र शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि उनके लिए साफ़-सफाई निगम चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा है। पूर्वी दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में गंदगी फैली रहती है। निगम के सफाई कर्मियों की हड़ताल से कई बार स्थिति बेहद अराजक हो जाती है और सड़कों पर निकलना भी दूभर हो जाता है...
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दिल्ली नगर निगम चुनाव के लिए नामांकन समाप्त होने के बाद राजधानी के चुनावी माहौल में गरमी आने लगी है। इस दौरान निगम में सत्तारूढ़ भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी तेज हो चुकी है। लेकिन दिल्ली वालों की बात करें, तो उनकी दृष्टि में सफाई और निगम में भ्रष्टाचार सबसे प्रमुख चुनावी मुद्दा है। अमर उजाला से बात करने वाले कई दिल्लीवासियों ने माना कि शहर में साफ़-सफाई की व्यवस्था सही नहीं है, जिससे लोगों को भारी परेशानी होती है। इस गंदगी से छुटकारा मिलना चाहिए। कुछ लोगों ने माना कि निगम में छोटे-छोटे काम कराने के लिए भ्रष्टाचार का सहारा लेना पड़ता है, इसे तकनीकी का सहारा लेकर समाप्त किया जाना चाहिए।
पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मीनगर के निवासी धर्मेंद्र शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि उनके लिए साफ़-सफाई निगम चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा है। पूर्वी दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में गंदगी फैली रहती है। निगम के सफाई कर्मियों की हड़ताल से कई बार स्थिति बेहद अराजक हो जाती है और सड़कों पर निकलना भी दूभर हो जाता है। रिहाईशी इलाकों और बाजारों में जिन जगहों पर ढलाव घर बने हैं, उन जगहों पर भी कूड़ा इधर-उधर दूर-दूर तक बिखरा पड़ा रहता है, जिससे बदबू फैलती है और इन एरिया से निकलने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सही समय पर इस गंदगी को न उठाया जाना, सबसे बड़ी समस्या का कारण बन जाता है। वे चाहते हैं कि निगम में जो भी सरकार आए, वह साफ़-सफाई के मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
विनोद नगर के राजू कुमार पेशे से ठेकेदार कर्मचारी हैं। वे मानते हैं कि नगर निगमों में भारी भ्रष्टाचार होता है। छोटे-छोटे काम कराने के लिए भी गलत रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। राजधानी में घरों के निर्माण के समय नगर निगम अधिकारियों के द्वारा लाइसेंस देने के लिए अनुचित लाभ लिया जाता है। किसी प्रमाण पत्र के बनवाने के लिए भी कर्मचारियों को घूस देनी पड़ती है। उनका मानना है कि इस पर हर हाल में रोक लगनी चाहिए। इस काम में तकनीक सबसे बड़ी मदद कर सकती है। किसी भी काम को करने के लिए ऑनलाइन सेवा प्रदान करना और किसी भी सेवा को निश्चित अवधि में पूरा न करने पर अधिकारियों-कर्मचारियों पर दंडित करने का कानून होने पर निगमों में भ्रष्टाचार को कम किया जा सकता है।
उम्मीदवार पहली प्राथमिकता
रोहिणी की रहने वाली डॉ. निशा जैन ने कहा कि निगम चुनाव में सफाई सबसे प्रमुख मुद्दा होती है, लेकिन उनका मानना है कि मतदान करते समय लोग उम्मीदवार से उनकी अपनी व्यक्तिगत पहचान को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। यही कारण है कि मतदान में मुद्दों की बजाय व्यक्तिगत संबंध ज्यादा बड़ा मुद्दा बन जाता है। इससे समस्याओं का समाधान नहीं होता। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार का अच्छा होना लोकतंत्र के लिए सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण है, लेकिन जातीय-धार्मिक आधार पर किसी उम्मीदवार को वोट देने की बजाय उसी उम्मीदवार को वोट दिया जाना चाहिए, जो लोगों के काम करता हो और आवश्यकता पर उपलब्ध रहता हो। उन्होंने कहा कि मतदान के समय उनकी पहली प्राथमिकता काम कराने वाले सही उम्मीदवार की होगी।
धर्म कोई आधार नहीं
ओखला निवासी मंसूर अली खान का मानना है कि विधानसभा-लोकसभा चुनावों में धार्मिक मुद्दों पर खूब चर्चा होती है, लेकिन स्थानीय चुनावों में धर्म बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं होता। ओखला के मुस्लिम बहुल इलाके में ज्यादातर राजनीतिक दल मुस्लिम उम्मीदवार ही उतारते आये हैं, यही कारण है कि यहां से मुस्लिम उम्मीदवार ही जीतते रहे हैं। लेकिन इससे एक गलत छवि बन जाती है कि कुछ लोग एक धर्म विशेष के उम्मीदवार को ही मतदान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि निगम चुनावों में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान और कुछ हद तक राजनीतिक दल का प्रभाव मतदाताओं को अपना मत निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।