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दिल्ली: शरणार्थी कैंप में जन्मी बच्ची 'नागरिकता' के साथ महापौर ने केक काटकर मनाया नव वर्ष

Wed, 01 Jan 2020 09:53 PM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhishek Singh Updated Wed, 01 Jan 2020 09:53 PM IST
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Mayor celebrates New Year 2020 by cutting cake with girl her name Citizenship
- फोटो : AmarUjala

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर अवतार सिंह ने मजनूं का टीला शरणार्थी कैंप में पैदा हुई बच्ची नागरिकता के साथ नव वर्ष मनाया। उन्होंने बच्ची के घर जाकर उसके माता पिता को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं और केक काटकर नव वर्ष की खुशियां बांटीं।

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इस मौके पर महापौर ने कहा कि बच्ची नागरिकता के माता पिता ने बच्ची नाम नागरिकता संशोधन कानून के आधार पर रखकर समाज में देश के प्रति निष्ठा और सद्भाव का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि 24 नवंबर को इस बच्ची का जन्म हुआ और बच्ची का नाम नागरिकता रखे जाने पर देशभर के लोगों ने इसकी प्रशंसा की। 
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इस मौके पर महापौर ने केक काटकर बच्ची और उसके माता-पिता व परिवार को केक खिलाया। इस दौरान बच्ची की मां ने महापौर से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की इच्छा जाहिर की और कहा कि वह नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू करने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद करना चाहती हैं। महापौर ने बताया कि बच्ची की मां ने पीएम से मिलने के लिए पीएमओ को पत्र भी लिखा है।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 लागू करकेे 2014 से पहले भारत आए शरणार्थियों को एक नई पहचान प्रदान की है जिससे शरणार्थियों को अब भारत की नागरिकता मिलेगी। इसके साथ ही इन लोगों को अन्य भारतीय नागरिकों की तरह ही अधिकार मिलेंगे। 

नागरिकता की दादी ने कहा था?

बता दें कि संसद में संशोधित नागरिकता विधेयक पारित होने के बाद अपनी एक महीने की बेटी का नाम ‘नागरिकता’ रख दिया। नागरिकता की दादी मीरा दास (40) ने कहा कि हम अपना घर, जमीन सब पीछे छोड़ आए हैं... सबकुछ पाकिस्तान में है। अब यही हमारा घर है। अगर आप हमें स्वीकार नहीं करेंगे तो हम कहां जाएंगे? कृपया हमारी पीड़ा को समझें और हमारे घावों को भरने वाले (कानून) के खिलाफ प्रदर्शन ना करें। 

पाकिस्तान के हैदराबाद से 2011 में दिल्ली आईं सोना दास (42) ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हमने जो तकलीफें झेली हैं, अगर आप उससे गुजरे होते तो आप कभी प्रदर्शन नहीं करते। यह कानून हमारे लिए आशा की नई किरण है।  

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