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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Maternal uncle gave a new lease of life to his five-month-old niece by donating a part of his liver

Delhi NCR News: मामा ने अपने जिगर का टुकड़ा देकर पांच माह की भांजी को दी नई जिंदगी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 07:21 PM IST
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मामा ने अपने जिगर का टुकड़ा देकर पांच माह की भांजी को दी नई जिंदगी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रक्षा बंधन से पहले भाई-बहन के रिश्ते की एक भावुक मिसाल सामने आई है। 24 वर्षीय शिवेंद्र कुमार पांडेय ने अपनी पांच माह की भांजी सांविका शुक्ला की जान बचाने के लिए अपने लिवर का एक हिस्सा दान कर दिया। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने जटिल लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी कर बच्ची को नया जीवन दिया।
सांविका जन्म के कुछ सप्ताह बाद ही पीलिया की चपेट में आ गई थी। जांच में उसके बाइल डक्ट में रुकावट पाई गई, जिसके कारण लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच रहा था और लिवर फेल होने का खतरा पैदा हो गया था। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी जान बचाने के लिए जल्द से जल्द लिवर ट्रांसप्लांट करना जरूरी था। अस्पताल में जांच के दौरान बच्ची के माता-पिता और दादी लिवर दान करने के लिए उपयुक्त नहीं पाए गए। ऐसे मुश्किल समय में बच्ची के मामा शिवेंद्र आगे आए और उन्होंने अपनी भांजी के लिए लिवर का एक हिस्सा दान करने का फैसला किया।
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अस्पताल के लिवर ट्रांसप्लांट विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट और यूनिट हेड डॉ. आशीष जॉर्ज ने बताया कि पांच माह के बच्चे का लिवर ट्रांसप्लांट बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। इतनी छोटी उम्र में रक्त वाहिकाएं बहुत छोटी होती हैं, इसलिए सर्जरी में बेहद सावधानी और सटीकता की जरूरत होती है। बच्ची के लिवर तक रक्त पहुंचाने वाली नस भी काफी छोटी थी। इस समस्या से निपटने के लिए कैडेवर डोनर से सुरक्षित रखी गई नस का इस्तेमाल किया गया। डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया। ऑपरेशन के बाद बच्ची की लगातार निगरानी की गई और करीब 20 दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब बच्ची की हालत में सुधार बताया गया है।
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शिवेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि अपनी भांजी की जान बचाने के लिए लिवर का हिस्सा देना उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला था। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और मुस्कुराती हुई भांजी को देखकर उन्हें बेहद खुशी हुई। सांविका की मां ने अपने भाई का आभार जताते हुए कहा कि मुश्किल समय में भाई का आगे बढ़कर बेटी की जिंदगी बचाना उनके लिए रक्षा बंधन का सबसे बड़ा उपहार है।
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