फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Master Plan 2031 for injurious for Arawali greening

खतराः वो अरावली की हरियाली मिटा देगा!

Sat, 04 Jan 2014 04:11 PM IST
सुरेंद्र दलाल/ अमर उजाला, गुड़गांव
सुरेंद्र दलाल/ अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sat, 04 Jan 2014 04:11 PM IST
विज्ञापन
Master Plan 2031 for injurious for Arawali greening

मास्टर प्लान 2031 अरावली की हरियाली को निगल जाएगा। 33 हजार 872 हेक्टेयर क्षेत्र को आवासीय क्षेत्र में बदल दिया जाएगा।

विज्ञापन


अरावली का सैकड़ों एकड़ पहाड़ी क्षेत्र भी इस दायरे में आ जाएगा। करीब दो दशक पहले अरावली क्षेत्र में आवासीय प्रोजेक्ट विकसित करने की शुरुआत हो गई थी।

गुड़गांव-फरीदाबाद रोड पर ग्वाल पहाड़ी में सबसे पहले बिल्डर क्षेत्र को लाइसेंस दिया गया था। इसके बाद बिल्डरों की सबसे अधिक मांग अरावली हिल्स की पहाड़ियां ही बन गईं।

मास्टर प्लान 2031 के तहत काम शुरू हो गया है। इसमें सोहना एरिया में बिल्डर कंपनियों ने अरावली पहाड़ियों को काटना शुरू कर दिया है।

एक अनुमान के मुताबिक मास्टर प्लान पूरा होने तक यहां से अरावली की पहाड़ियों का बड़ा हिस्सा समतल कर हरियाली गायब कर दी जाएगी।

तिगरा, घाटा, ग्वाल पहाड़ी, सोहना, रिठौज, घामड़ौज, दमदमा, बालियावास सहित अन्य गांवों में प्रोजेक्ट को अनुमति मिल चुकी है।

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार गुड़गांव-मेवात इलाके में अरावली में पहले आठ प्रतिशत तक हरियाली थी, जो फिलहाल छह प्रतिशत तक रह चुकी है।

मास्टर प्लान पूरा होने के बाद यह चार प्रतिशत से भी कम हो जाने की आशंका है। कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस वे को पूरा करने के लिए कई जगह पहाड़ी का सीना चीरा गया है।
विज्ञापन


मेवात, गुड़गांव के हिस्से में पहाड़ी को समतल तक सड़क बनाने का काम पूरा हो चुका है। ग्वाल पहाड़ी में अरावली का एक बड़ा हिस्सा सरकार ने विशेष आर्थिक जोन के लिए दे रखी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पर्यावरणविद् आरपी बलवान ने बताया कि अरावली से लगातार छेड़छाड़ की जा रही है। इस कारण इसका दायरा सीमित हो रहा है। इसकी हरियाली लुप्त हो रही है। पेड़-पौधों की कई प्रजातियां विलुप्त हो गईं। कई वन्य प्राणी भी अब इस एरिया में नहीं दिखते।


गुड़गांव सिटीजन काउंसिल के अध्यक्ष आरएस राठी का कहना है कि प्राकृतिक संपदाओं का लगातार दोहन हो रहा है। गुड़गांव के पहाड़ी क्षेत्र को सीमित कर दिया गया है। यहां के पहाड़ों में बने जल संसाधन स्रोत, बांध गायब हो चुके हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed