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अब दुनिया के नक्शे पर दिखेगी यह भारतीय मस्जिद
मलिक असगर हाशमी/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Wed, 21 Jan 2015 08:01 PM IST
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के साथ ही साइबर सिटी की पुरातात्विक महत्व की मस्जिद सराय अलावर्दी खान के सौंदर्यकरण का रास्ता साफ हो गया है।
कोर्ट द्वारा जिला प्रशासन को महीने के भीतर मस्जिद को अतिक्रमण मुक्त करने के निर्देश देने पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की चंडीगढ़ सर्किल ने इसके सौंदर्यकरण के खाके पर अमल की कार्रवाई शुरू कर दी है।
सर्किल के अधिकारी अक्षत कौशिक की मानें तो विभाग का इरादा मस्जिद को पुरातत्व के अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर लाना है। आरोप है कि हरियाणा वक्फ बोर्ड की नीतियों के कारण मस्जिद के करीब घना बसावट खड़ा हो गया है।
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इसे हटाने के मसले पर काफी समय से कोर्ट में विवाद चल रहा है। आबादी न हटाई जाए इसके लिए स्थानीय लोगाें ने स्टे के लिए कोर्ट में अपील दायर की थी, जो मंगलवार को खारिज कर दी गई।
पुरातत्व विभाग ने बताया कि अगली सुनवाई 11 मार्च तक जिला प्रशासन को अतिक्रमण हटा कर कोर्ट को रिपोर्ट सौंपनी है। अभी स्मारक करीबन 100 घरों की आबादी से बिल्कुल घिरी हुआ है।
मस्जिद के बारे में
यह प्राचीन स्मारक दिल्ली के मुगल सम्राट मोहम्मद शाह द्वितीय के कार्यकाल में नवाब अलावर्दी खान ने निर्मित कराया था। यहां एक सराय भी था। मस्जिद की दीवारों पर लगे लाल पत्थराें पर मुगलिया नक्काशी के बेहतर नमूने आज भी मौजूद हैं।
इसके आगे कभी जोहड़ हुआ करता था जिसे भर दिया गया है। मस्जिद से कुछ दूरी पर पंच पीर की दरगाह है। यहां सराय का अस्तित्व भी नहीं बचा है।
मस्जिद से छेड़छाड़
प्राचीन मस्जिद के मूल निर्माण से काफी हद तक छेड़छाड़ की गई है। पुरातत्व विभाग का कहना है मस्जिद में प्राचीन पत्थर की जगह टाइल्स लगा दिए गए हैं। मीनारों, छतों पर अपने हिसाब से निर्माण कराया गया है। टिन शेड भी डाल दिए गए हैं।
मस्जिद को दिया जाएगा मूल स्वरूप
एएसआई की मानें तो मस्जिद को कब्जे में लेने के बाद इसे मूल स्वरूप में लाने के लिए टाइल, प्लास्टर आदि हटाए जाएंगे। प्राचीन स्मारक के करीब के छह कनाल चार मरला के भूखंड पर हरियाली के साथ पार्क विकसित करने की योजना है। इसकी सुरक्षा के लिए चारदीवारी भी खड़ी की जाएगी।
सुप्रीमकोर्ट जाने की तैयारी
हाईकोर्ट के आदेश के बाद से यहां रहने वालों में खलबली है। वह किसी भी सूरत में जगह खाली करने को राजी नहीं हैं। कोर्ट में पैरवी करने वाले शाहजाद का कहना है कि वह फैसले खिलाफ सुप्रीमकोर्ट जाएंगे।
-तीन दशक से यहां रहने वाले महबूब अंसारी कहते हैं कि मस्जिद के करीब जगह मिलने के बाद ही वह यहां से हटेंगे।
-पिछले 35 वर्षों से यहां रहने वाले वाराणसी के मोहम्मद फारूक कहते हैं कि जीवन भर की कमाई यहां लगाने के बाद अब कहीं और जाना पसंद नहीं करेंगे।
-चार दशक से सराय में रहने वाली नजमा कहती हैं कि घर बचाने के लिए चाहे जो करना पड़े करेंगे।
-पिछले 19 वर्षों से यहां रह रहे महमूद अंसारी का कहना है कि उनका मकान ढहा दिया गया तो वह कहां जाएंगे।
वक्फ बोर्ड की भूमिका से नाराजगी
वक्फ बोर्ड की भूमिका से सराय अलावर्दी और पुरातत्व विभाग, दोनों नाराज हैं। विभाग का कहना है कि यह मस्जिद पहले बोर्ड के अधीन थी। किराए के चक्कर में यहां अवैध तरीके से आबादी बसने दी गई।
इस दौरान प्राचीन स्मारक से छेड़छाड़ भी होती रही। बाद में वहां रहने वालों को अंधेरे में रखकर करीब 2009 में पुरातत्व विभाग को इसे पूरी तरह सौंप दी गई।
जबकि यहां के लोगों का कहना है कि विभाग के स्थानांतरण से उन्हें अनभिज्ञ रखा गया। यहां तक कि मस्जिद में आज भी बोर्ड के ही पेशइमाम तैनात हैं। रही बात छेड़छाड़ की तो उन्हें मस्जिद की मूल दीवार से पांच फीट दूर निर्माण करने की हिदायत थी जिसका वे आज भी पालन कर रहे हैं।
क्या कहते हैं डीसी
उपायुक्त टीएल सत्यप्रकाश का कहना है कि आदेश की कॉपी आने के बाद इसका अक्षरश: पालन किया जाएगा। वक्फ बोर्ड के इस्टेट ऑफिसर जमालुद्दीन का कहना है कि मामला अतिक्रमण का है। मस्जिद आज भी वक्फ के कब्जे में है।
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कोर्ट द्वारा जिला प्रशासन को महीने के भीतर मस्जिद को अतिक्रमण मुक्त करने के निर्देश देने पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की चंडीगढ़ सर्किल ने इसके सौंदर्यकरण के खाके पर अमल की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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सर्किल के अधिकारी अक्षत कौशिक की मानें तो विभाग का इरादा मस्जिद को पुरातत्व के अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर लाना है। आरोप है कि हरियाणा वक्फ बोर्ड की नीतियों के कारण मस्जिद के करीब घना बसावट खड़ा हो गया है।
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इसे हटाने के मसले पर काफी समय से कोर्ट में विवाद चल रहा है। आबादी न हटाई जाए इसके लिए स्थानीय लोगाें ने स्टे के लिए कोर्ट में अपील दायर की थी, जो मंगलवार को खारिज कर दी गई।
पुरातत्व विभाग ने बताया कि अगली सुनवाई 11 मार्च तक जिला प्रशासन को अतिक्रमण हटा कर कोर्ट को रिपोर्ट सौंपनी है। अभी स्मारक करीबन 100 घरों की आबादी से बिल्कुल घिरी हुआ है।
मस्जिद के बारे में
यह प्राचीन स्मारक दिल्ली के मुगल सम्राट मोहम्मद शाह द्वितीय के कार्यकाल में नवाब अलावर्दी खान ने निर्मित कराया था। यहां एक सराय भी था। मस्जिद की दीवारों पर लगे लाल पत्थराें पर मुगलिया नक्काशी के बेहतर नमूने आज भी मौजूद हैं।
इसके आगे कभी जोहड़ हुआ करता था जिसे भर दिया गया है। मस्जिद से कुछ दूरी पर पंच पीर की दरगाह है। यहां सराय का अस्तित्व भी नहीं बचा है।
मस्जिद से छेड़छाड़
प्राचीन मस्जिद के मूल निर्माण से काफी हद तक छेड़छाड़ की गई है। पुरातत्व विभाग का कहना है मस्जिद में प्राचीन पत्थर की जगह टाइल्स लगा दिए गए हैं। मीनारों, छतों पर अपने हिसाब से निर्माण कराया गया है। टिन शेड भी डाल दिए गए हैं।
मस्जिद को दिया जाएगा मूल स्वरूप
एएसआई की मानें तो मस्जिद को कब्जे में लेने के बाद इसे मूल स्वरूप में लाने के लिए टाइल, प्लास्टर आदि हटाए जाएंगे। प्राचीन स्मारक के करीब के छह कनाल चार मरला के भूखंड पर हरियाली के साथ पार्क विकसित करने की योजना है। इसकी सुरक्षा के लिए चारदीवारी भी खड़ी की जाएगी।
सुप्रीमकोर्ट जाने की तैयारी
हाईकोर्ट के आदेश के बाद से यहां रहने वालों में खलबली है। वह किसी भी सूरत में जगह खाली करने को राजी नहीं हैं। कोर्ट में पैरवी करने वाले शाहजाद का कहना है कि वह फैसले खिलाफ सुप्रीमकोर्ट जाएंगे।
-तीन दशक से यहां रहने वाले महबूब अंसारी कहते हैं कि मस्जिद के करीब जगह मिलने के बाद ही वह यहां से हटेंगे।
-पिछले 35 वर्षों से यहां रहने वाले वाराणसी के मोहम्मद फारूक कहते हैं कि जीवन भर की कमाई यहां लगाने के बाद अब कहीं और जाना पसंद नहीं करेंगे।
-चार दशक से सराय में रहने वाली नजमा कहती हैं कि घर बचाने के लिए चाहे जो करना पड़े करेंगे।
-पिछले 19 वर्षों से यहां रह रहे महमूद अंसारी का कहना है कि उनका मकान ढहा दिया गया तो वह कहां जाएंगे।
वक्फ बोर्ड की भूमिका से नाराजगी
वक्फ बोर्ड की भूमिका से सराय अलावर्दी और पुरातत्व विभाग, दोनों नाराज हैं। विभाग का कहना है कि यह मस्जिद पहले बोर्ड के अधीन थी। किराए के चक्कर में यहां अवैध तरीके से आबादी बसने दी गई।
इस दौरान प्राचीन स्मारक से छेड़छाड़ भी होती रही। बाद में वहां रहने वालों को अंधेरे में रखकर करीब 2009 में पुरातत्व विभाग को इसे पूरी तरह सौंप दी गई।
जबकि यहां के लोगों का कहना है कि विभाग के स्थानांतरण से उन्हें अनभिज्ञ रखा गया। यहां तक कि मस्जिद में आज भी बोर्ड के ही पेशइमाम तैनात हैं। रही बात छेड़छाड़ की तो उन्हें मस्जिद की मूल दीवार से पांच फीट दूर निर्माण करने की हिदायत थी जिसका वे आज भी पालन कर रहे हैं।
क्या कहते हैं डीसी
उपायुक्त टीएल सत्यप्रकाश का कहना है कि आदेश की कॉपी आने के बाद इसका अक्षरश: पालन किया जाएगा। वक्फ बोर्ड के इस्टेट ऑफिसर जमालुद्दीन का कहना है कि मामला अतिक्रमण का है। मस्जिद आज भी वक्फ के कब्जे में है।