मारुति का उत्पादन शुरू, जाट आरक्षण से हुआ था प्रभावित
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मारुति के मानेसर और गुडग़ांव प्लांट में मंगलवार के दूसरे हॉफ से कार उत्पादन का काम शुरू हो गया है। इस बात की जानकारी मारुति प्रबंधन द्वारा आधिकारिक तौर से दी गई है।
इससे मारुति की हरियाणा और एनसीआर भर की वेंडर कंपनियों को काफी राहत मिली है। क्योंकि जाट आंदोलन के कारण मारुति में काम बंद होने के कारण इन कंपनियों के का काम भी बुरी तरह से प्रभावित हो गया था।
ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि मारुति के लिए काम करने वाली औद्योगिक यूनिटों को प्लांट में काम शुरू होने से ऑक्सीजन मिल गया है।
जाट आंदोलन से साइबर सिटी में अगर कोई ऑटोमोबाइल कंपनी सबसे अधिक प्रभावित हुई तो वह मारुति है। यहां पर 20 फरवरी को बी शिफ्ट से काम बिल्कुल बंद हो गया था।
कंपनी को हुआ 10 हजार कारों का नुकसान
रविवार को प्लांट में छुट्टी होती है और सोमवार को पूरे दिन एक भी कार यहां नहीं बनाई गई। मारुति उद्योग कामगार यूनियन के महासचिव कुलदीप जांघू ने बताया कि बी शिफ्ट से कर्मचारी कंपनी में पहुंचे और काम शुरू कर दिया है।
जाट आरक्षण आंदोलन के कारण मारुति को अब तक 10 हजार कारों का नुकसान हुआ है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति रोजाना 5000 कारों का निर्माण करती है।
शनिवार को आंदोलन के कारण सिर्फ ढाई हजार कारें बनाई गई थीं। मंगलवार को काम शुरू होने के बाद ढाई हजार कारें बनाई गईं। रोहतक में मारुति की वेंडर कंपनी है वहां से कंपनी को जरूरी कंपोनेंट नहीं मिलने से काम को बंद करना पड़ा था। मारुति प्रबंधन का कहना है कि अब कंपोनेंट की आपूर्ति धीरे-धीरे प्लांट को होने लगी है।