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इस बार की होली में बाहुबली पर भारी पड़ रहे मोदी, सज गया है बाजार
Sun, 17 Mar 2019 02:30 AM IST
vivek shukla
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 17 Mar 2019 02:30 AM IST
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होली नजदीक आते ही बाजार सजने लगे हैं। पिचकारी और रंगों की वैरायटी बाजारों में दिख रही है। इस साल की होली बॉलीवुड और चुनावी माहौल से अछूती नहीं है। बाजार में चुनावी रंग का असर नजर आ रहा है। पिचकारियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बाहुबली और सलमान की पिक्चरों से सजी पिचकारियों की काफी मांग है। 400 रुपये में पीएम मोदी की फोटो लगी पिचकारियां बिक रही हैं। बाहुबली की कीमत 280 है। जबकि सलमान की पिचकारी 200 से 300 रुपये में बिक रही है। विक्रेता रामविलास ने बताया कि पिछले साल अरविंद केजरीवाल सहित कई नेताओं की पिचकारियां थीं। लेकिन इस बार नरेंद्र मोदी की मांग ज्यादा है। कई लोग फिल्मी सितारों की पिचकारियां पसंद करते हैं। सलमान, शाहरुख , दीपिका व करीना बाजार में उपलब्ध हैं।
मालपुआ के बिना पूर्वांचल की होली अधूरी
होली की पूर्वांचल वासियों ने तैयारियां जोर शोर से शुरू कर दी हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। फाग गाए जाते हैं और बिहार की संस्कृति व सभ्यता का परिचय लघु नाटकों के माध्यम से दिया जाता है। बिहार में गुलाल व अबीर से तो होली खेली ही जाती है। होलिका दहन की राख और कीचड़ को भी लोग एक दूसरे पर लगाने से पीछे नहीं हटते है। समूहों में लोग किसी को भी पकड़कर पानी में डाल देते हैं। होली में मालपुवे का स्वाद मिठास भर देता है।
पहनावा होता है खास
पूर्वांचल महासभा के मुन्ना कुमार शर्मा ने बताया कि पूर्वांचल में होली का पहनावा भी खास होता है। होली पर पुरुष मलमल का कुर्ता व सफेद टोपी पहनते है, जबकि महिलाएं लाल और पीले रंग की साड़ी पहनती हैं। बदलते परिवेश में काफी बदलाव आ गया है। अब लोग जींस के ऊपर सफेद कुर्ता पहन लेते हैं और मार्केट में होली पर बिकने वाली कैप लगा लेते हैं।
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देवर भाभी की मजाक
बिहार में होली का त्योहार देवर और भाभी के लिए काफी मायने रखता है। परिवार में शामिल नई बहू के लिए होली का त्योहार खास होता है। देवर, भाभी को रंग लगाने के लिए उत्साहित रहते हैं, जबकि भाभी बचने का प्रयास करती हैं। दोनों के बीच हंसी मजाक चलता है। परिवार के बुजुर्ग बहू को होली पर उपहार देते हैं।
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मालपुआ के बिना पूर्वांचल की होली अधूरी
होली की पूर्वांचल वासियों ने तैयारियां जोर शोर से शुरू कर दी हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। फाग गाए जाते हैं और बिहार की संस्कृति व सभ्यता का परिचय लघु नाटकों के माध्यम से दिया जाता है। बिहार में गुलाल व अबीर से तो होली खेली ही जाती है। होलिका दहन की राख और कीचड़ को भी लोग एक दूसरे पर लगाने से पीछे नहीं हटते है। समूहों में लोग किसी को भी पकड़कर पानी में डाल देते हैं। होली में मालपुवे का स्वाद मिठास भर देता है।
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पहनावा होता है खास
पूर्वांचल महासभा के मुन्ना कुमार शर्मा ने बताया कि पूर्वांचल में होली का पहनावा भी खास होता है। होली पर पुरुष मलमल का कुर्ता व सफेद टोपी पहनते है, जबकि महिलाएं लाल और पीले रंग की साड़ी पहनती हैं। बदलते परिवेश में काफी बदलाव आ गया है। अब लोग जींस के ऊपर सफेद कुर्ता पहन लेते हैं और मार्केट में होली पर बिकने वाली कैप लगा लेते हैं।
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देवर भाभी की मजाक
बिहार में होली का त्योहार देवर और भाभी के लिए काफी मायने रखता है। परिवार में शामिल नई बहू के लिए होली का त्योहार खास होता है। देवर, भाभी को रंग लगाने के लिए उत्साहित रहते हैं, जबकि भाभी बचने का प्रयास करती हैं। दोनों के बीच हंसी मजाक चलता है। परिवार के बुजुर्ग बहू को होली पर उपहार देते हैं।