Nuh Violence: नफरत की सियासत के हाथों हुआ दो युवाओं का कत्ल, उपद्रवियों ने जमकर मचाया था तांडव
नूंह में हुई हिंसा के बाद 31 अगस्त की रात को उपद्रवियों ने नायब इमाम मोहम्मद साद की हत्या कर दी गई। मूल रूप से यूपी के बागपत जिले के गांव पांची में रहने वाले बजरंग दल कार्यकर्ता प्रदीप की भी हत्या कर दी गई।
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जालिम को इंसान बना दे या अल्लाह, घर की मेरे दीवार हटा दे या अल्लाह। हिंदू-मुस्लिम बैठ के खाएं एक थाली में, ऐसा हिंदुस्तान बना दे या अल्लाह...। सौहार्द के तराने की यह पंक्तियां थाना सेक्टर-57 में निर्माणाधीन धर्मस्थल में रहकर नायब इमाम मोहम्मद साद सुनाया करता था।
नूंह में हुई हिंसा के बाद 31 जुलाई की रात को उपद्रवियों ने नायब इमाम मोहम्मद साद की हत्या कर दी थी। अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही नायब इमाम की यह पंक्तियां गाती हुई वीडियो देखकर हर कोई यही सवाल कर रहा है आखिर मौलाना का कसूर क्या था, जो उपद्रवियों ने उन पर हमला किया। मूल रूप से बिहार के जिला सीतामढ़ी में मनियाडीह के गांव पैडोल के वार्ड संख्या-8 के रहने वाले नायब इमाम साद ने गुरुग्राम में आठ महीने पहले ही नौकरी हासिल की थी। वह यहां पर मोअज्जिम (अजान देने वाले) भी थे। उनकी उम्र महज 22 साल थी।
बताया गया है कि मौलाना दीनी तालीम और तकरीर के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द की भी पैरोकारी करते थे। वह सामुदायिक सौहार्द के तरानों को सोशल मीडिया पर भी पोस्ट करते थे। मौलाना की इन वीडियो पोस्ट को काफी पसंद भी किया जा रहा था। अब भी यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
सोशल मीडिया यूजर जता रहे दुख
इस वीडियो को देखकर यूजर कमेंट भी कर रहे हैं। सना तबस्सुम नाम की एक यूजर ने इसे बहुत ही दुखदायी घटना बताया है। फैजान मिर्जा ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाने की बात कही है। संजय यादव ने कहा है कि हिंदू-मुस्लिम भाईचारे पर दुआ को नज्म के रूप में पढ़ने वाले इमाम की हत्या कर दी गई। यह सौहार्द का कत्ल है। मौलाना के भाई शादाब अनवर कहते हैं कि एक अगस्त को भाई को सीतामढ़ी अपने घर जाना था। आनंद बिहार से मुजफ्फरपुर जाने वाली सप्त क्रांति एक्सप्रेस (12558) में उसका टिकट था। बड़ी बहन की शादी होनी है। मौलाना साद उसी के लिए गुरुग्राम में नौकरी करने आए थे।
बड़े सपने लेकर गुरुग्राम आया था प्रदीप
मूल रूप से यूपी के बागपत जिले के गांव पांची में रहने वाला बजरंग दल कार्यकर्ता प्रदीप बड़ा ही हंसमुख इंसान था। करीब सात-आठ साल से वह गुरुग्राम में ही मकान बनाकर रहने लगा था। साइबर सिटी में वह बड़े सपने लेकर आया था। यही कारण है कि उसने यहां अपना कारोबार शुरू किया। मिलनसार स्वभाव के कारण ही आसपास के लोग उसकी सादगी के मुरीद थे। करीब डेढ़ साल पहले ही उसने बजरंग दल संगठन में शामिल हुआ था। वह पिलाना प्रखंड में संयोजक पद पर भी रहा था।
प्रदीप के बडे़ भाई दीपक ने बताया कि गांव से गुरुग्राम आने के बाद प्रदीप ने अपना मकान भी बना लिया था। पत्नी बच्चों के साथ ही प्रदीप का छोटा भाई हैप्पी भी उसके साथ ही रहता था। बादशाहपुर में ही प्रदीप की गैस चूल्हे के साथ ही बर्तन की छोटी सी दुकान है। अपने इस कारोबार को प्रदीप और बढ़ाना चाहता था। यही कारण है कि वह दिन-रात मेहनत करता था। दीपक ने बताया कि प्रदीप पिछले दिनों गांव गया हुआ था। एक दिन पहले ही वह इसलिए गुरुग्राम वापस आ गया था कि उसे जलाभिषेक यात्रा में शामिल होना था। प्रदीप की इस बेरहमी से हुई हत्या से पड़ोस में रहने वाले लोग भी हैरान हैं। बादशाहपुर में रहने वाले रविंद्र का कहना है कि प्रदीप बड़े ही सज्जन स्वभाव का था। हमेशा लोगों से बड़ी ही शालीनता से बात करता था। विश्वास ही नहीं होता कि कोई ऐसे सहज व्यक्ति की इस प्रकार निर्मम हत्या कर सकता है।
बता दें कि बीते सोमवार को प्रदीप अपने साथियों के साथ जलाभिषेक के लिए नल्हड स्थित मंदिर गया था। जलाभिषेक यात्रा के दौरान हुई हिंसा के बाद वह सोमवार देर शाम को नूंह से अपने घर मारुति कुंज लौट रहे थे।