कोरोना फोबियाः मानसिक रूप से भी बीमार हो रहे हैं बहुत लोग, बढ़ सकते हैं मरीज
- ठीक होने के बाद भी पाए जा रहे हैं भय और अवसाद जैसे लक्षण
- विशेषज्ञों ने कहा, सामाजिक अलगाव का डर और नकारात्मक माहौल है समस्या
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विस्तार
एम्स अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर राजकुमार श्रीनिवास ने बताया कि मनोरोग एक ऐसी दशा है जो एक दिन में नहीं होती है। यह धीरे-धीरे बनती है। कोरोना के मरीज हो या आम लोग। इस समय सभी मानसिक परेशानी झेल रहे हैं। कोविड अस्पतालों मे कई मरीज हैं, जिन्हें हर समय डर सताता रहता है। उन्हें नींद न आने जैसी समस्या हो रही है। वह मानसिक दबाव भी महसूस कर रहे हैं। यह सब अवसाद के लक्षण हैं, जो लंबे समय मेें मनोरोग की समस्या बन जाती है।
बीते चार महीनों में उन लोगों की तादाद काफी बढ़ी है, जो पहले से किसी मानसिक परेशानी से ग्रस्त हैं और अब उनकी परेशानी काफी बढ़ गई है। यह समस्या लंबे समय तक रहती है तो लोग मनोरोगी बन जाते हैं और आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं।
डॉ. राजकुमार श्रीनिवास
केस : 1
दिल्ली के मालवीय नगर निवासी मणिकांत ठाकुर ने बताया कि कुछ दिन पहले वह भी संक्रमित हो गए थे। इसके बाद से उनके दिमाग में एक अजीब सा डर बैठ गया था। हर समय अकेले रहने के दौरान दिमाग में अलग प्रकार के ख्याल आ रहे थे। मनोदशा काफी खराब हो गई थी। उन्होंने डॉक्टरों से सलाह ली। अब वह कोरोना से ठीक हो चुके हैं और फिलहाल किसी प्रकार की समस्या नहीं है।
केस : 2
सुमित्रा देवी 15 दिन पहले जीटीबी अस्पताल में भर्ती थीं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में उन्हें रात में नींद आना बंद हो गया था। आंखों के सामने हो रही मौतों को देखकर उनके मन में भय हो गया था। अभी तक वह डर दिमाग में बैठा हुआ है। इसलिए वह ठीक होने के बाद हमेशा अपने परिवार के साथ रहती हैं, ताकि उनके दिमाग में कोई ख्याल ना आए।
इसलिए गंभीर हो रही समस्या
दिल्ली के सबसे बड़े मानसिक रोग अस्पताल इह्बास के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर ओमप्रकाश ने बताया कि कोविड-19 के बारे में सूचनाओं की बाढ़ ने बड़े पैमाने पर लोगों में डर बना दिया है। हालत यह हो गई है कि एक बार छींकने व खांसने पर भी लोगों को संक्रमण का अंदेशा होने लगता है। महामारी को लेकर चारों ओर एक नकारात्मक माहौल है। संक्रमितों को परिवार की चिंता के साथ-साथ सामाजिक अलगाव का डर भी सता रहा है। इस कारण उनके दिमाग में नकारात्मक ख्याल आते रहते हैं और उनमें अवसाद जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कोरोना महामारी के कारण लोग अस्पताल में जाने से बच रहे हैं। इस वजह से वह या तो घर पर ही ठीक हो रहे हैं या उनकी बीमारी और गंभीर रूप लेती जा रही है।
ऐसे पाया जा सकता है काबू
डॉक्टर ओमप्रकाश की सलाह है कि मानसिक अवसाद जैसी बीमारी पर काबू पाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है सकारात्मक सोच रखना सोच रखना। लोगों को सोचना होगा कि इस संकट में वह अकेले नहीं हैं। किसी भी समस्या के बारे में लोगों को अपने परिवार वालों से खुलकर बात करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर आंख मूंदकर भरोसा करना छोड़ना होगा। किसी भी बीमारी के लिए डाक्टरों पर ही भरोसा करना होगा। सही समय पर पूरी नींद लेनी होगी। योग और प्राणायाम का भी सहारा लेना चाहिए। किसी भी शंका की स्थिति में डाक्टरों और मानसिक रोग विशेषज्ञों की सलाह लेने से हिचकिचाना नहीं चाहिए।
मरीजों की होगी काउंसलिंग
डॉक्टर ओमप्रकाश बताते हैं कि कोरोना के मरीजों को अंदर मनोरोग के गंभीर लक्षण देखते हुए दिल्ली सरकार ने सभी अस्पतालों मे मनोचिकित्सक की तैनाती की है, जो भी मरीज मानसिक परेशानी से ग्रस्त हैं उनकी काउंसलिंग की जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक सूची बनाकर सभी मनोज चिकित्सकों को दे दी है।
2020 के अंत तक बढ़ सकते हैं 25 फीसदी मरीज
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के मुताबिक, देश की 1.30 अरब की आबादी में से नौ करोड़ से ज्यादा लोग किसी न किसी किस्म के मानसिक अवसाद की चपेट में हैं। संगठन ने एक रिपोर्ट में वर्ष 2020 के आखिर तक 25 फीसदी आबादी के मानसिक बीमारियों की चपेट में आने का अंदेशा जताया है।
सरकार ने जारी किया है हेल्पलाइन नंबर
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने किसी भी प्रकार की मनो सामाजिक सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 080-4611007 जारी किया है। इस पर कॉल कर लोग सहायता ले सकते हैं।