भाजपा के कई प्रत्याशियों ने लगाई हार की ‘हैट्रिक’, कार्यालय पर छाया रहा सन्नाटा
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भाजपा के कई ऐसे नेता हैं जो जीत तो नहीं सके, लेकिन हार की हैट्रिक जरूर लगा दी। मुंडका सीट से मास्टर आजाद सिंह लगातार तीसरी बार हारे। वे पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के भाई हैं। इसी तरह किराड़ी से अनिल झा, नांगलोई से दो बार मनोज कुमार शौकीन हारे तो तीसरी बार पत्नी सुमन लता शौकीन भी हार गई।
इसी तरह वजीरपुर से महेंद्र नागपाल, मोतीनगर से सुभाष सचदेवा, तिलकनगर से राजीव बब्बर, द्वारका से प्रदुमन राजपूत, मटियाला से राजेश गहलौत, नजफगढ़ अजित खड़खड़ी, बिजवासन सत्यप्रकाश राणा, आरकेपुरम अनिल कुमार शर्मा, छत्तरपुर ब्रह्म सिंह तंवर, संगम विहार से एससीएल गुप्ता, बदरपुर से रामवीर सिंह बिधूड़ी, ओखला से ब्रह्म सिंह, बाबरपुर से नरेश गौड़ हार, चांदनी चौक से सुमन गुप्ता हार की हैट्रिक लगाने वालों में शामिल हैं।
त्रिलोकपुरी से किरण बैद्य, तुगलकाबाद से विक्रम बिधूड़ी, सदर बाजार से जयप्रकाश, करोल बाग से योगेद्र चंदोलिया, शालीमार बाग से रेखा गुप्ता, राजेंद्र नगर से सरदार आरपी सिंह, कस्तूरबा नगर से रविंद्र चौधरी दूसरी बार हारे।
धरी रह गईं जश्न मनाने की तैयारियां लड्डुओं और ढोल-नगाड़ों का था इंतजाम
चुनावी जीत का दावा करने वाली भाजपा सुबह के समय तो अपनी जीत पक्की मान कर चल रही थी। इसे लेकर कार्यकर्ता भी बेहद उत्साहित थे, लेकिन रुझान आने के बाद कार्यकर्ताओं का जोश धराशायी होता चला गया। सुबह पूरी तैयारियों (पोस्टर-बैनर) आदि लेकर पार्टी कार्यालय पहुंचे समर्थक दोपहर बाद धीरे-धीरे अपने घर लौटने लगे।
नई दिल्ली के पंडित पंत मार्ग स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में तैयारी भी की गई थी, लेकिन जैसे ही रुझान आने लगा तो कार्यालय खाली होने लगा। सुबह 11 बजे तक कार्यकर्ता यह मानने को तैयार नहीं थे कि इतनी बुरी हार होगी। दोपहर 12 बजे के बाद तो पार्टी कार्यालय में मौजूद नेताओं के चेहरों पर स्पष्ट होने लगा कि जीत कोसों दूर है।
इस वजह से पार्टी कार्यालय में सन्नाटा पसर गया। यहां पहुंचे ढोल-नगाड़े वाले भी धीरे नदारद हो गए। लोकसभा चुनाव के परिणाम आने वाले दिन जिस तरह से तैयारी थी ठीक वैसे ही प्रदेश भाजपा कार्यालय ने भी तैयारी कर रखी थी। जगह-जगह केबिन बनाया गया था, जहां प्रवक्ताओं को पाटी की रणनीति से अवगत करना था।
यह बताने की तैयारी थी कि भाजपा जो कहती है वह करती है। चुनावी परिणाम को देखने के लिए टीवी की व्यवस्था के साथ 47 किलो का लड्डू भी जीत के उत्साह में बांटे जाने थे, लेकिन जैसे-जैसे आप जीत की तरफ अग्रसर होती दिखी तो भाजपा ने अपनी तरफ से सभी तैयारियां समेटी ली।
नहीं थी चुनाव नतीजों से कोई खास उम्मीद, दिखा आम दिनों जैसा नजारा
दिल्ली विधानसभा चुनाव का रुझान आने के बाद डीडीयू मार्ग पर एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा था। सड़क के एक छोर पर कांग्रेस तो दूसरे छोर पर आम आदमी पार्टी का कार्यालय है। कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में सन्नाटा पसरा था। कांग्रेस नेताओं ने हार को स्वीकार किया है।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित ने तो यहां तक कह दिया कि हमारे नेता फरेबी निकले। मतगणना के बाद तस्वीर साफ हो गई कि पूरे चुनाव में कांग्रेस कहीं भी मुकाबले में नहीं रही। एक दो सीटों पर ही पार्टी प्रत्याशी बीच-बीच में थोड़ा आगे निकले, लेकिन जल्द ही पीछे भी हो गए।
सुबह बल्लीमारान से हारून यूसुफ आगे गए थे और जंगपुरा से तरविंदर सिंह मारवाह काफी देर तक आगे रहे। दोपहर बाद तक स्थिति यही रही और धीरे-धीरे कांग्रेस प्रत्याशी अपनी हार को स्वीकार करने लगे। वर्ष 2015 के बाद एक बार फिर हार मिलने पर प्रदेश के मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने सोशल मीडिया पर हार को स्वीकार किया। मुकेश कुमार भी विकासपुरी से कांग्रेस प्रत्याशी थे।
वहीं, आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में आई चांदनी चौक से प्रत्याशी अलका लांबा ने भी ट्वीट करके अपनी पराजय मान ली। ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही। बिजवासन से कांग्रेस के पूर्व विधायक विजय लोचव ने हार के कई कारण गिना डाले।