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Manusmriti: डीयू के लॉ प्रोग्राम में नहीं पढ़ाई जाएगी मनुस्मृति, कुलपति ने वीडियो जारी कर खारिज किया प्रस्ताव

Thu, 11 Jul 2024 10:57 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 11 Jul 2024 10:57 PM IST
सार

कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि मनु स्मृति को नही पढ़ाया जाएगा। डीयू ने काफी सोच विचार करने के बाद विधि संकाय के इस प्रस्ताव को खारिज़ किया है। 

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Manusmriti will not be taught in DU law program Vice Chancellor rejected the proposal
डीयू कुलपति प्रो. योगेश - फोटो : X/@UnivofDelhi

विस्तार

दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के स्नातक प्रोग्राम में प्राचीन संस्कृत ग्रंथ मनु स्मृति को अब नहीं पढ़ाया जाएगा। विधि संकाय की और से गुरुवार को मिले इस प्रस्ताव को डीयू ने खारिज कर दिया है। डीयू कुलपति ने एक वीडियो जारी कर कहा कि काफी विचार के बाद विधि संकाय के इस प्रस्ताव को खारिज़ किया गया है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए शुक्रवार को होने वाली अकादमिक परिषद की बैठक में रखने की तैयारी थी।

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कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि मनु स्मृति को नही पढ़ाया जाएगा। डीयू ने काफी सोच विचार करने के बाद विधि संकाय के इस प्रस्ताव को खारिज़ किया है। डीयू को यह प्रस्ताव गुरुवार को विधि संकाय की ओर से मिला था। मालूम हो कि लॉ फैकल्टी ने डीयू से अपने प्रथम और तृतीय वर्ष के छात्रों को मनुस्मृति पढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम में संशोधन करने की मंजूरी मांगी थी। इसके लिए संशोधनों के अनुसार मनुस्मृति पर दो पाठ जी एन झा द्वारा मेधातिथि के मनुभाष्य के साथ मनुस्मृति और टी कृष्णस्वामी अय्यर द्वारा मनुस्मृति की टिप्पणी स्मृतिचंद्रिका पेश किए जाने का प्रस्ताव भेजा था। विधि संकाय की पाठ्यक्रम समिति की 24 की बैठक में संशोधन का सुझाव देने के निर्णय को मंजूरी दी गई थी।

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वही, सोशल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एसडीटीएफ) ने इस पर विरोध जताते हुए डीयू कुलपति को पत्र लिखा था। पत्र में लिखा गया था कि मनुस्मृति के कई खंडों में महिलाओं की शिक्षा और समान अधिकारों का विरोध किया गया है। मनुस्मृति के किसी भी खंड या भाग को शामिल करना संविधान के मूल ढांचे और भारतीय संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने इस प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से वापस लेने और शुक्रवार को होने वाली अकादमिक परिषद की बैठक में इसे मंजूरी नहीं दिए जाने की मांग की थी। कुलपति से अनुरोध किया था है कि विधि संकाय में मौजूदा पाठ्यक्रम के आधार पर न्यायशास्त्र का पेपर पढ़ाना जारी रखा जाए। बताया जा रहा है इसको लेकर शुरू हुए विरोध को देखते हुए ही डीयू ने इस प्रस्ताव को खारिज करने का फैसला किया।

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तीन नए कानूनों को पढ़ाया जाएगा
दिल्ली विश्वविद्यालय का विधि संकाय एक जुलाई से देशभर में लागू हुए तीन नए कानूनों को भी पढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इस आशय का प्रस्ताव 12 जुलाई को होने वाली अकादमिक परिषद की बैठक में लाया जाएगा। बैठक में इसको मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है। इसके बाद इस प्रस्ताव को 27 जुलाई को कार्यकारी परिषद की बैठक में रखा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलते ही इन्हें क्रिमिनल लॉ के तहत पढ़ाना शुरू कर दिया जाएगा। मालूम हो कि भारत सरकार ने भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 को लागू किया है। इन्हें डीयू के लॉ पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इन्हें पहले व दूसरे सेमेस्टर में क्रिमिनल लॉ के अंतर्गत पढ़ाया जाएगा। अब तक छात्र भारतीय दंड संहिता (आईपीसी 1860), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी 1973) और इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 को पढ़ते आ रहे हैं।

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