घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले पर टूटा योगी की पुलिस का कहर, 15 घंटे गुजारे सलाखों के पीछे
नोएडा पुलिस ने दो घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले युवक को 15 घंटे तक हवालात में अपराधियों की तरह बंद रखा। बाद में घायल के परिजन के लिखित बयान पर छोड़ा गया।
हालांकि, पहले परिजनों ने ही पुलिस को सूचना देकर मददगार पर दोषारोपण किया था। इसके बाद पुलिस ने बिना पूछताछ किए ही निर्दोष को हवालात की हवा खिला दी। दूसरी ओर, हादसे में घायल हुए एक युवक की मौत हो गई है। जबकि दूसरे को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई।
जानकारी के अनुसार, सर्फाबाद गांव के सुमित शर्मा सोमवार रात तकरीबन 9.30 बजे सेक्टर-71 स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर के पास खड़े थे। उनके सामने वहां बाइक सवार दो युवकों की मिनी ट्रक से टक्कर हो गई। दोनों बुरी तरह से घायल हो गए।
सुमित घायलों को ऑटो से सेक्टर-51 स्थित शिवालिक अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने घायलों को सेक्टर-27 स्थित कैलाश अस्पताल में रेफर कर दिया। यहां पर डॉक्टरों ने शुभम (21) को मृत घोषित कर दिया। शुभम सर्फाबाद में ही किराए के मकान में रह रहा था।
पुलिस बिना कोई पूछताछ किए सुमित को हवालात में बंद कर दिया
वह सेक्टर-70 स्थित जे मार्ट में नौकरी करता था। घटना में घायल दूसरा युवक सर्फाबाद निवासी मोहित शर्मा (20) को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। सूचना मिलने पर शुभम और मोहित के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने मददगार सुमित पर ही दोषारोपण करते हुए पीसीआर को सूचना दे दी।
सेक्टर-20 थाना पुलिस बिना कोई पूछताछ किए सुमित को हवालात में बंद कर दिया। मंगलवार सुबह शुभम के परिजनों को जानकारी हुई कि घटना में सुमित का कोई हाथ नहीं है। वह घायलों की मदद के इरादे से अस्पताल लेकर आया था।
तब उन्होंने थाने में पहुंच कर सुमित के बेकसूर होने की बात बताई। मृतक शुभम के भाई ने लिखित में पुलिस को पूरी जानकारी दी। तब जाकर पुलिस ने सुमित को रिहा किया। उधर, घायल मोहित को मंगलवार शाम डिस्चार्ज कर दिया गया।
अपराधियों की तरह रखा गया
पुलिस दावा कर रही है कि वह सुरक्षा की दृष्टि से सुमित को थाने में लेकर आई थी। फिर भी उसने 15 घंटे अपराधियों की तरह सुमित को हवालात में बंद रखा। ऐसे में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खडे़ हो रहे हैं। पुलिस ने सुमित का मोबाइल फोन और स्कूटी की चाबी जब्त कर ली। यहां बता दें कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि कोई शख्स घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाता है तो पुलिस उससे पूछताछ नहीं करेगी।