लोन नहीं चुका पाने पर की थी 4 लोगों की हत्या, 2 साल बाद पुलिस ने ऐसे सुलझाया मामला
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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने वर्ष 2016 में वजीराबाद में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या की गुत्थी को दो वर्ष बाद सुलझा लिया है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी अभिषेक पाल को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने लोन नहीं चुका पाने पर एक साथी व मृतक व्यवसायी के भतीजे के साथ मिलकर पूरे परिवार को खत्म कर दिया था।
मृतक व्यवसायी की टीचर बेटी का शव हापुड़ में मिला था। यूपी पुलिस शुरू में इसे हॉरर किलिंग का मामला समझ रही थी। अब खुलासा हुआ है कि ये हॉरर किलिंग का मामला नहीं था। पुलिस व्यवसायी, उसकी पत्नी व बेटे के शव की तलाश कर रही है।
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डॉ. अजित कुमार सिंगला के अनुसार, ये मामला जुलाई, 2016 में उस समय सामने आया था, जब वजीराबाद, दिल्ली में रहने वाली टीचर नैना का हापुड़ नहर में शव मिला। नहर के पास ही नैना की कार मिली, जोकि नैना के गारमेंट्स व्यवसायी पिता वेदप्रकाश के नाम रजिस्टर्ड थी।
पुलिस ने जब नैना के परिवार को तलाश किया, तो पूरा परिवार गायब मिला। ऐसी परिस्थिति में यूपी पुलिस को लगा कि नैना की हत्या उसके परिवार वालों ने की है। यूपी पुलिस ने हॉरर किलिंग का मामला दर्ज किया था। बाद में पुलिस को पता लगा कि नैना के पिता वेदप्रकाश, मां साधना व भाई की भी हत्या कर दी गई है।
पैसे लौटाने का दबाव नहीं झेल पाया
हत्या का एक आरोपी यूपी में सड़क दुर्घटना में मारा गया था, जबकि मुख्य आरोपी गांव वजीराबाद, दिल्ली निवासी अभिषेक पाल उर्फ मिंटू (26) को अपराध शाखा ने अब गिरफ्तार किया है। तीसरा आरोपी फरार है। इंस्पेक्टर सुनील जैन, एसआई राकेश व विमल की टीम ने अभिषेक को आउटर रिंग रोड, संजय अखाड़ा से गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से कट्टा व दो कारतूस बरामद किए हैं।
आरोपी अभिषेक ने बताया कि वह वेदप्रकाश व उसके परिवार को अच्छी तरह जानता था। उसका दोस्त रितेश कटियार वेदप्रकाश की मजनूं का टीला स्थित दुकान पर काम करता था। वेदप्रकाश ने अपना दूसरा व्यवसाय खोल लिया और दुकान रितेश को किराये पर दे दी। रितेश का व्यवसाय नहीं चला और उसे घाटा हो गया।
ऐसे में रितेश ने अभिषेक की गारंटी पर वेदप्रकाश से अगस्त, 2015 में मोटा लोन लिया। रितेश लोन नहीं लौटा पा रहा था। ऐसे में वेदप्रकाश ने पैसे वापस देने के लिए दोनों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। अभिषेक ने ये परेशानी अपने दोस्त व वेदप्रकाश के भतीजे सोनू को बताई।
सोनू चाचा के व्यवसाय व प्रॉपर्टी पर कब्जा करना चाहता था। दोनों ने वेदप्रकाश व उसके परिवार के हत्या की साजिश रच ली। इस साजिश में मनोज उर्फ मन्नू उर्फ बाबला (उस समय 16 वर्ष) को भी शामिल किया।
ऐसे किया पूरे परिवार को खत्म
अभिषेक एक पिस्टल लेकर आया। उस समय वेदप्रकाश का बेटा अभिषेक से कार चलाना सीख रहा था। 15 जुलाई, 2016 को सुबह 11 बजे अभिषेक ने वेदप्रकाश को ये कहकर बुलाया कि बेटे शुभम की कार का टायर बदलवाना है। जैसे ही वेदप्रकाश कार में बैठा, तो मन्नू ने क्लच वायर से वेदप्रकाश का गला दबाकर हत्या कर दी।
इसके बाद वेदप्रकाश के शव को डिक्की में डाल लिया। इनको लगा कि शुभम ने उनको वेदप्रकाश के साथ देख लिया है, तो आरोपियों ने दोपहर दो बजे शुभम को बुलाया। जैसे ही वह कार में बैठा, तो क्लच वायर से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। शव को डिक्की में डाल दिया। इस तरह वेदप्रकाश की पत्नी साधना की भी हत्या कर दी थी। इसके बाद बेटी नैना को बुलाया और उसकी भी इसी तरीके से हत्या कर दी। रात को कार को घर के पास पार्क कर दिया था। शव कार की डिक्की में थे।
शव को हापुड़ में नहर में फेंका
आरोपी 16 व 17 जुलाई की रात सभी शवों को नैना की कार से हापुड़ ले गए। वहां शवों को अपर गंगा कैनाल में फेंक दिया था। यूपी पुलिस को नैना का शव मिल गया था।