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दांत के दर्द में तुलसी, अश्वगंधा और मुलेठी कितनी कारगर, बताएगा शोध
Thu, 21 Nov 2019 07:11 AM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 21 Nov 2019 07:11 AM IST
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दांत में दर्द होने पर अक्सर लोग पुराने घरेलू नुस्खों को ज्यादा अहमियत देते हैं लेकिन वास्तविक रुप से यह कितना कारगर है? अब तक वैज्ञानिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। अब दिल्ली के सबसे बड़े दंत अस्पताल मौलाना आजाद दंत चिकित्सा शिक्षा संस्थान के डॉक्टरों ने घरेलू नुस्खों का प्रभाव पता करने के लिए शोध शुरू किया है। अस्पताल आने वाले मरीजों को इसमें शामिल किया गया है।
हालांकि शोध अभी शुरुआती चरण में है। डॉक्टरों का कहना है कि दांत, मुंह या दाढ़ में दर्द होने पर तुलसी या काली मिर्च इत्यादि का इस्तेमाल कई लोग करते हैं। कुछ को इससे राहत मिलती है तो कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें काफी परेशानी होती है। इसलिए यह उपचार कारगर है या नहीं, इसका अभी तक वैज्ञानिक सबूत नहीं है। इसलिए तुलसी, अश्वगंधा, मुलेठी जैसे आयुर्वेदिक उत्पाद पर शोध शुरू किया है।
अस्पताल की वरिष्ठ डॉ. सुनीता गुप्ता बताती हैं कि उनके यहां कई ऐसे मरीज आते हैं जिन्हें दांत या दाढ़ में दर्द होने पर वह घरेलू नुस्खे अपनाते हैं। इनमें से कुछ ठीक हो जाते हैं जबकि कुछ को दिक्कत होती है। इन नुस्खों का वैज्ञानिक प्रभाव जानने के लिए एक शोध की आवश्यकता है।
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इसकी पड़ताल करना जरूरी है कि इन आयुर्वेदिक उत्पादों को इस्तेमाल में लाया जा सकता है या नहीं। हालांकि इसका परिणाम आने में कुछ समय लगेगा लेकिन इसे तभी सार्वजनिक किया जाएगा।
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हालांकि शोध अभी शुरुआती चरण में है। डॉक्टरों का कहना है कि दांत, मुंह या दाढ़ में दर्द होने पर तुलसी या काली मिर्च इत्यादि का इस्तेमाल कई लोग करते हैं। कुछ को इससे राहत मिलती है तो कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें काफी परेशानी होती है। इसलिए यह उपचार कारगर है या नहीं, इसका अभी तक वैज्ञानिक सबूत नहीं है। इसलिए तुलसी, अश्वगंधा, मुलेठी जैसे आयुर्वेदिक उत्पाद पर शोध शुरू किया है।
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अस्पताल की वरिष्ठ डॉ. सुनीता गुप्ता बताती हैं कि उनके यहां कई ऐसे मरीज आते हैं जिन्हें दांत या दाढ़ में दर्द होने पर वह घरेलू नुस्खे अपनाते हैं। इनमें से कुछ ठीक हो जाते हैं जबकि कुछ को दिक्कत होती है। इन नुस्खों का वैज्ञानिक प्रभाव जानने के लिए एक शोध की आवश्यकता है।
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इसकी पड़ताल करना जरूरी है कि इन आयुर्वेदिक उत्पादों को इस्तेमाल में लाया जा सकता है या नहीं। हालांकि इसका परिणाम आने में कुछ समय लगेगा लेकिन इसे तभी सार्वजनिक किया जाएगा।